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Dipak 'Mashal' ki rachnaayen

Dipak 'Mashal' ki rachnaayen

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07/21/2010

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<एक लघु कथा का अंत>

" डा. िवदा कया बेिमसाल रचना िलखी है आपने ! सच पूिछए त| मने आ7तक ]सी संवे7नायुकत किवता नहl सुनी", "अरे 7ुकला 7ी
आप सुन"े कैसे? ]सी रचनाए त| सालl म, ह7ारl रचना7ं म से एक िनकल के आती है. मेरी त| आख Hर आ5" "ये ]सी वैसी नहl
बि¯क आपक| सुH5ा कुमारी चlहान Vर महा7ेवी वमl 7ी की "े"ी म पहुचाने वाली कित है िवदा 7ी. है की नहl Hõना"र साब?"
एक के बा7 एक लेखन 7"त के मूU¯य िव(ानl के मुखारिबं 7 से िनकले ये 7¯7 7ैसे-7ैसे डा.िवदा वा¯"य के कानl म प7 रहे थे वैसे
वैसे 3नके 77य की वे7ना बõती 7ा रही थी. ल"ता था मान| क|5 िपघला हुआ 7ी7ा कानl म डाल रहा ह|. अपनी तारी7l के बं Uते
पुलl क| पीछे छ|7 3स किव-"|7ी की अ¯यuा िवदा अतीत के "िलयारl म वापस लlõती 7| व1 पूव 3सी ÷थान पर आय|ि7त एक
अ¯य किव-"|7ी म पहुच 7ाती है, 7ब वह िस7 िवदा थी बेिसक ि7uा अिUकारी डा.िवदा नहl. हl अलब¬ा एक रसायन िवHान की
7|Uाथl 7÷र थी.
7ाय7 5तने ही ल|" 7मा थे 3स "|7ी म Hी, सब वही चेहरे, वही मlसम, वही माहlल. सHी तथाकिथत किव एक के बा7 एक करके
अपनी-अपनी नवीनतम ÷वरिचत किवता, "7ल, "ीत आि7 सुना रहे थे. अिUकl7 लेखिनयl 7हर के म7हूर डlकõर, 7|7ेसर, वकील,
5ं 7ीिनयर Vर ि7ं िसपल आि7 की थl. 7ेखने लायक या ये कह की हसने लायक बात ये थी की हर कलम की कित क| किवता के
अनु÷प न िमलकर रचनाकार के 7ह7े के अनु÷प 7ा7 या सराहना िमल रही थी. 5üा 7ुüा ]से Hी थे 7| Vरl से बेहतर िलखते त| थे
लेिकन प7िवहीन या स¯मान7नक पे7े से न 7ु7े ह|ने की व7ह से आयाराम-"याराम की तरह अन7ेखे ही रहते. "|7ी 7"ित पे थी,
समीuा7ं के बीच-बीच म 5हाके सुना5 प7ते त| कHी िब÷कुõ की कुरकुराहõ या चाय की चुि÷कयl की आवा7. 7ाय7 37 म सबसे
छ|õी ह|ने के कार" िवदा क| अपनी बारी आने तक ल¯बा 5¯ते7ार करना प7ा. सबसे आिखर म लेिकन अ¯यu मह|7य, 7| िक एक
77ासिनक अिUकारी थे, से पहले िवदा क| का¯यपा5 का अवसर अहसान िक तरह ि7या "या. 'पु'17Uान समा7 म एक नारी का
का¯यपा5 व| Hी एक ¯¯-¯$ साल की अब|U ल7की का, 5सका हमसे कया मुकाबला?' क5 बुि¿7ीिवयl की ¯य|िरयl खाम|7ी से ये
सवाल कर रहl थl.
वैसे त| िवदा बचपन से ही किवता, कहािनयl, ¯यं ¹य आि7 िलखती आ रही थी लेिकन 3से यही एक 7ु:ख था की क5 बार "|ि7यl म
का¯यपा5 करके Hी वह 3न ल|"l के बीच क|5 िव7े1 ÷थान नहl अि7त कर पा5 थी. ि7र Hी 'बीती क| िबसािरये' स|च िवदा ने एक
]सी किवता पõनी 7ारं H की ि7सक| सुनकर 3सके 7|÷तl Vर सहपाि5यl ने 3से पलकl पे िब5ा िलया था Vर 3स किवता ने सHी के
ि7लl Vर हl5l पे क¯7ा कर िलया था. ि7र Hी 7ेखना बाकी था की 3स कित क| िव(ान सािह¯यकारl Vर आल|चकl की 77ं सा का
5¯पा िमलता है या नहl.
ते7ी से U7कते ि7ल क| काबू म करते हुए, अपने सुमUुर क¯5 से आUी किवता सुना चुकने के बा7 िवदा ने अचानक महसूस िकया की
'ये कया किवता की 7ान सम5ी 7ाने वाली अितसंवे7न7ील पं िकतयl पे Hी ना आह, ना वाह Vर ना ही क|5 7ितिñया!' ि7र Hी हlसला
बुलं7 रखते हुए 3सने िबना सुर-लय-ताल िब"7े किवता क| समाि¯त तक पहुचाया. पर¯तु तब Hी ना ताली, ना तारी7, ना सराहना Vर
ना ही सलाह, कया ]सी सं वे7ना7ील रचना Hी िकसी का ¯यान ना आक7 कर सकी? तHी अ¯यu 7ी ने ब|ला "अHी सुUार की बहुत
आव°यकता है, 7यास करती रह|." मायूस िवदा क| ल"ा की 5सबार Hी 3ससे चूक हु5 है. अपने िवचिलत मन क| स¯हालते हुए व|
अ¯यu मह|7य की किवता सुनने ल"ी. एक ]सी किवता ि7सके ना सर का पता ना पैर का, ना Hाव: का Vर ना ही अथ का, या यूं
कह की 5ससे बेहतर त| 77l पlच का छा7 िलख ले. लेिकन अच¯Hा ये की ]सी क|5 पं िकत नहl ि7सपे तारी7 ना हु5 ह|, ]सा क|5
मुख नहl ि7सने तारी7 ना की ह| Vर त| Vर समा¯त ह|ने पे तािलयl की "7"डाहõ थामे ना थमती.
सािह¯य7"त की 3स स¯ची आराUक का आहत मन पूछ बै5ा 'कया यहl Hी रा7नीित? कया यहl Hी सर÷वती की हार? ]से ही
तथाकिथत सािहि¯यक म5ाUी7l के कार" हर र|7 ना 7ाने िकतने य|¹य 37ीयमान रचनाकारl क| सािहि¯यक आ¯मह¯या करनी प7ती
ह|"ी Vर वही िविH7 प7l क| सु7|िHत करने वालl की न7रं 7ा7 करने य|¹य रचनाए Hी पुर÷कत ह|ती ह.' 3स ि7न िवदा ने 5ान िलया
की अब वह Hी स¯मान7नक प7 हािसल करने के बा7 ही 3स "|7ी म वापस आये"ी.
वापस वतमान म लlõ चुकी डा. िवदा के चेहरे पर Uु7ी नहl 7ु:ख था की ि7स किवता क| 7| व1 पूव ¯यान 7ेने य|¹य Hी नहl सम5ा
"या आ7 वही किवता 3सके प7 के साथ अितिवि77 ह| चुकी है. अं त म सारे घõनाñम क| सबक| ÷मर" करने के बा7 ]से छ7
सािह¯य7"त क| 7ू र से ही 7"ाम कर िवदा ने 3सम पुन: 7वे7 ना करने की घ|1"ा कर 7ी. अब 3से र|कता Hी कlन, सHी किव व
आल|चक"" त| स¯चा5 के आ5ने म खु7 क| नं "ा पाकर 7मीन 7õने का 5¯ते7ार कर रहे थे.
7ीपक 'म7ाल'
~एक समसामियक रा7नीितक ¯यं ¹य~
आ7 की ता7ा खबर, आ7 की ता7ा खबर... 'कसाब की 7ाल म नमक 7या7ा', आ7 की ता7ा खबर..... .
चlिकए मत, कया म7ाक है यार, आप चlके Hी नहl हl"े कयlिक हमारी महान मीिडया कुछ समय बा7 ]सी खबर बनाने ल"े त| क|5 ब7ी
बात नहl. आप िव"त कुछ ि7नl की Uबरl पर 7रा "lर 7रमा5ए, 'कसाब की िरमlड एक ह1ते Vर बõी', 'कसाब ने माना की व|
पािक÷तानी है', 'कसाब मेरा बेõा है-एक पािक÷तानी का 7ावा', 'कसाब मेरा ख|या हुआ बेõा-एक 5ं िडयन मl', '7ेल के अ¯7र ब¯ब-
र|Uक 7ेल बने"ी कसाब के िलए', 'कसाब के िलए वकील की ख|7 ते7', 'अं 7िल बाघमारे लड"ी कसाब के बचाव म', '"lUी की
आ¯म-कथा पõ रहा है कसाब' व"ैरह-व"ैरह.... अरे महारा7, ये मिहमामंडन कयl? कसाब न हुआ '7ये लकी, लकी 7ये' का अHय
7े7ल ह| "या.7रा स|िचये की कया "ु7रती ह|"ी ये सब 7ेख कर 37ीक¯"न, करकरे, सालसकर Vर कामते 7ैसे 7ही7l पर. अरे
5तनी बार नाम त| हमने 7े7 क| 5स Hयावह संकõ से िनकलने वाले 5न वीरl का Hी नहl िलया. मा7 कीि7ये म ये सब ¯यं ¹य की Hा1ा
म िलख सकता था म"र म 3न मु^यमं7ी 7ी की तरह सं वे7नाहीन नहl बन सकता 7| 7ही7l का स¯मान करना नहl 7ानते. 5तने के
बाव7ू7 7ाय7 महामीिडया Vर तथाकिथत सेकुलरl का तक ह| की ' पाप से घ"ा कर|, पापी से नहl', त| 5ीक है 3से 3सके पापl की
ही स7ा 7े 7|, नहl िह¯मत प7ती त| "ीता पõ के 7े7|, कुरान का सही अथ सम5 के 7े7| Vर 7|, ]सी स7ा 7|, ]सी स7ा 7| की हर
आतं क की ÷ह 7ना ह| 7ाये, कlप 7ाये.
खैर 7या7ा ब|ल "या, कयlिक 5स सब के िलए 5न मीिडया वालl क| 7|1ी 5हराना Hी सही नहl है, 5न बेचारl के िलए त| र|7ी-र|õी
वतन Vर 577त से ¯यारी ह| "यी है. तHी 'काली मु"l ने स7े7 अ°डे ि7ए' 4ेिकं " ¯यू7 बनाते ह Vर चुनावी बरसात का मlसम आते ही
ये Hी स¬ाUारी सरकार क| पुन: बहाल करने के 'अिHयान'(साि77 नहl कह सकता, ये 7¯7 चुनाव आय|" क| H7का सकता है
खाम^वाह मु5 पर Hी रासुका ल" सकती है) के तहत अघ|ि1त, अ7माि"त, अ7कõ िक¯तु 77¯य "5बं Uन बना लेते ह. चा"कय नीित
म नयी नीित एड करनी प7े"ी ' ि7सकी ला5ी 3सकी Hस' Hैस 5सिलए की क5 ह 7ैसे की 7ेिसडõ 7ी, ची7 5लेक7न किम>र 7ी,
सी बी आ5 7ी, मीिडया 7ी, ¯यायाUी7 7ी.
कमाल 7ेिखये की ¬ व1 तक मूक-बिUरl के िलए 7|7ाम बने रहने के बा7 हमारे अित7ितHा7ाली 7Uानमं7ी 7ी अuम 7Uानमं7ी का
लेबल हõाने के िलए अचानक आ7तक की तरह ह¯ला ब|ल की मु5ा म आ "ए, म"र व| Hी हा5कमान के 57ारे पर. ]से ल"ा 7ैसे
मािलक ने ब|ला ह| 'õlमी छू '. अरे महारा7 7या कर| हम पीअच.डी., ]7.एन.ए.सी. िड7ीUारक 7|7ेसर नहl चािहए 7| घ7ी 7ेख के
कलास लेने आय Vर घ7ी 7ेख के िबना कुछ सम5ाए चले 7ाए (]से ल|" सलाहकार ही अ¯छे ल"ते ह). मािलक, सिचन ह|ना एक बात
है Vर "ैरी िक÷õन ह|ना 7ू सरी, 7÷री नहl की अ¯छा िखलाडी अ¯छा क|च Hी सािबत ह|. हम एक लीडर चािहए न की 7|पीस.
7बामा 7ी कलाकार आ7मी ह, खूब मी5ी मी5ी बात कहl पी ]म साब के बारे म, Hा5 5लेक7न õा5म है, व| Hी मनम|हक अ7ा से 5ूमते
हुए पलõ के तारी7 कर "ए Hा5 की. 5सपर मु5े सं ÷कत का एक °ल|क या7 आता है िक-
'3¯[÷य िववाहे1ु "ीतं "ायि¯त "7H:, पर÷परं 77ं÷यती अह| ÷प: अह| "ु"ं'
7या7ा मुि°कल अथ नहl है- 3õ के िववाह म "Uे 7ी ने "ीत "या, ि7र 7|नl ने आपस म ही एक 7ुसरे के "ले(आवा7) Vर ÷प की
77ंसा Hी कर ली. सच है 7ी नेता 7ी वे7l की 7र लlõ रहे ह.
मु5े सच म नहl पता की नेह'-"lUी पिरवार के सबसे छ|õे च°म-7-िचरा" ने कुछ 3¯õा-पु¯õा ब|ला था की नहl (कयlिक सी.डी. नहl
7ेिख) म"र ये त| सच है की आर|प ल"े ह, बाकी स¯चा5 चुनाव बा7 ही पता चले"ी कयlिक अHी हा5कमान ने ची7 5लेक7न किम>र
की 7ं 7ीर õा5õ कर रखी है. म"र "ीमान व'" 7ी, अ¯छा सु¯7र, Uािमक नाम पाया है आपने Vर आपके सारे पिरवार ने . 7रा स|च
सम5 के ही ब|ल लेते, 7|7 म ह|7 ख| ि7या, 5तना Hावुक ह|ने की कया 7÷रत थी. ल|" अHी आपके िपता7ी के सjकमlं क| नहl
Hूले ह, माता 7ी प7ु-पuी 7ेम म ¯य÷त ह, ल|" 3नसे Hी 7÷त ह, आप कयl क|õ म खा7 कर बै5े Hैये . अ"र ]सा कहना ही था त|
7सपाल H]ी साब के 3¯õा-पु¯õा म एक एपीस|ड बना लेते, ि7र मा7ी मl" लेते.
अरे लेलेले अ"र मने मासूम लालू के िलए नहl िलखा त| 5स महान सेकुलर का ि7ल õू õ 7ाये"ा Vर ल¯ला ÷5 7ाये"ा. खैर 7äा
आपकी त| क¯ची ल|5 है, 7| 7ी म आये ब|ल|. वैसे Hी आपकी "लती नहl मानता म, चारा खा के क|5 Vर ब|ले"ा Hी कया(या7 रहे ये
चारा है, रा"ा 7ताप ने Hू से की र|िõयl खा5 थl व| Hी अपने 7े7 के िलए, 5सिलए अपने क| 3स केõे"री म मत सम5ना). लेिकन एक
नया रा7 पता चला की चारा आपने राब7ी क| Hी िखलाया है, व| त| Hला ह| 3नकी 7ुबान का ि7सने खुल के सब प7l7ा7 कर ि7या
की 3नके ि7मा" म 7| है व| कया खाने से ह| सकता है.
आहा हा, पासवान साब त| मु5े स7ाि7व अमरापुरकर की या7 ि7ला 7ेते ह(िरयल ला57 नहl रील ला57 वाले अमरापुरकर की).
माननीय मुलायम 7ी के बारे म िलखने से त| कलम Hी 5¯कार करती है, वैसे Hी म 5स ¯लl" Vर ¯यं ¹य की "िरमा नहl ि"राना चाहता.
बिहन मायावती 7ी के िलए 7÷र करब¿ िनवे7न है आप ल|"l से की एक बार 5स बेचारी क| ¯-× ि7न के िलए ही सही 7Uानमं7ी बनवा
7| यार. पु¯पक िवमान से कुछ िव7े7ी 7lरे मार ले"ी, बाहर की Uरती 7ेख ले"ी, िव7े7ी मेमl से कुछ 7ै7न िõ¯स ले ले"ी, 7े7 म ¬-$
ह7ार अपनी ÷õे¯यू ल"वा ले"ी Vर 3¬र 77े7 म कर|7l के करती है यहl अरबl के वारे-¯यारे कर ले"ी(5ं õरने7नल बथडे पाõl के
िलए चं7ा 7या7ा चािहए ना) Vर 7या7ा कुछ नहl. ि7र ल¯ला क|5 ब7ी सम÷या 7ैसे ही 7े7 के सामने आवे"ी अपने आप ही H7H7ा
के 5÷ती7ा 7े 7े"ी. 3सकी तम7ा पूरी कर 7| यार, कम से कम स¯चा5 म एक त| '÷लमड|" िमिलयेनर' बने .
बहुत 7ेर से कमे¯õ िकये 7ा रहा हू H5या, अब सुन| "lर से ]से िलखते-पõते रहने से कुछ ना ह|ने वाला, कुछ 5ान|, कुछ कर|. मने
त| स|च िलया है अ"ला 5लेक7न ल7ने का, आप Hी िडसा5ड करल| या िबना मेरा नाम बताये सुसा5ड कर ल|. कयlिक अब ये ही 7|
आ¯7न ह. स¯चा5 ये है की आ7 7ब तक एक ]म.पी. एक डी.]म. के बराबर य|¹य(िस7 िड7ी वाला य|¹य नहl, ब|लने Vर करने
वाला य|¹य) नहl ह|"ा तब तक 7े7 का यू ही मिõयामेõ ह|ता रहे"ा Vर 5स 7ैसे न 7ाने िकतने ¯यं ¹य सामने आते रह"े.
एक बात ि7ल से बताना Hा5ल|" की "कया आप ल|"l क| ]सा नहl ल"ता की 3¯मी7वारl के नाम के बा7 एक आिखरी ~¯7न 5नम से
क|5 नहl का ह|ना चािहए Vर यि7 ¬¤% से 7या7ा मत7ाता 3स ~¯7न क| चुनते ह त| पुन: चुनाव ह|. व| Hी नए 3¯मी7वारl के साथ
ि7ससे की सHी पािõयl क| ये स¯7े7 7ाये की अब 'अ¿ल|कतं 7' नहl चले"ा, 3नका 3¯मी7वार नहl चले"ा बि¯क 7नता का नेता
चले"ा. संिवUान म सं 7|Uन ह|ना चािहए िक कुछ िव7े1 य|¹यता वाला ¯यिकत ही सlस7 या िवUायक प7 का 3¯मी7वार ह| वनl ]से ही
Hिसयl की पी5 से 3तर के ल|" 7े7 िक रेल •केलते रह"े."
अरे 7ा"| 7ाहक 7ा"|, अब Vर घिõया माल मत खरी7|. एक न5 ñlित का सू7पात कर|.
7ीपक 'म7ाल'
1- ~"7ल~
क|5 5क खूबसूरत, "ुन"ुनाता "ीत बन 7ा3,
मेरी िक÷मत कहl ]सी, िक तेरा मीत बन 7ा3.
तेरे न मु÷कुराने से, यहl खाम|7 है महि7ल,
मेरी वीरान है ि7तरत, म कैसे 7ीत बन 7ा3.
तेरे आने से आती है, 57 मेरी V 7ीवाली,
तेरी 7ीवाली का म Hी, क|5 एक 7ीप बन 7ा3.
लहू-ए-ि7÷म का 5क-5क, €तरा तेरा है अब,
िस7 5तनी र7ा 7े 7े, म तु5पे 7ीत बन 7ा3.
नाम मेरा Hी 7ािमल ह|, 7| चचl 5°क का आये,
7| सि7यl तक 7हl माने , म ]सी रीत बन 7ा3.
मु5से 7ेखे नहl 7ाते, तेरे 5ुलसे हुए आसू,
मेरी 7िरया7 है मlला, म मlसम 7ीत बन 7ा3.
कहl 7ाये ख7ा ह|के, 'म7ाल' तेरे आ"न से,
क|5 ]सी 7वा 7े 7े, िक बस अतीत बन 7ा3.
7ीपक 'म7ाल' ••.¤×.¤‚
2- ~"7ल~
कHी म चल नहl पाया, कHी व| 'क नहl पाए,
मेरे 7| हमस7र थे, साथ व| रह नहl पाए.
मेरे घर म नहl आ5, िकतने सालl से 7ीवाली,
तू आ 7ाये त| आ"न म, अUेरा रह नहl पाए.
ल"ाते ह सHी त|हमत, म तु5से हार 7ाता हू,
मेरी ह÷ती ही ]सी है, िक क|5 िõक नहl पाए.
म मl5ी हू म"र खु7 न, कHी 3स पार 7ा पाया,
मेरे अरमl ही लहरl पे, कHी Hी बह नहl पाए.
कमर õू õी नहl मेरी, िकसी की 7ी-हु7ूरी से,
ब|5 बõता "या हर पल, पर कlUे 5ुक नहl पाए.
ना 7रेब कह 7ेना, िसला-ए-चाहत कl 'म7ाल',
सैलाबे-7ुनू-ए-5°क, तुम ही सह नहl पाए.
7ीपक 'म7ाल' ••.¤×.¤‚
7| 77बात -
(3) 7ूता खlच के मार| H5या
अब Hी अ"र न मान ये त|,
7ूता खlच के मार| H5या.
बाõ ल"ा 7| ब7मा7l की,
7ूता खlच के मार| H5या.
ि7य| लाल 7रनैल खबिरया,
तु¯ह कHी न ल"े न7िरया,
िलखते-िलखते खबर तुमने ,
5नकी खबर Hी ले ली H5या.
बु7 हl, वेन हl या हl िप¯लू (पी. िच7ं बरम)
7ूता खlच के मार| H5या.
ये लार ि"राते व|õl पर,
Vर र|लर Uरते छाती पर,
घुस आये तािलबानी घर म,
5नकी ब7ली न पिरपाõी पर.
]से नेता7ं के सर पे,
7ूता खlच के मार| H5या.
सक रहे सब अपनी र|õी,
आ7 वतन की ला7 पर,
मारा िह¯7|÷तl क| पहले,
ि7र र|ते अं ितम अर7ास पर.
]से नlõं कीबा7l के मुंह पर,
7ूता खlच के मार| H5या.
अरबl Hर के 5|ली म व|,
ि7खलाते बस थ|7ा-थ|7ा,
7| 7े7 नचाते अं "ुली पर ह,
3नका घर ना "ा7ी-घ|7ा.
]से 5ू5े मüारl क|,
7ूता खlच के मार| H5या.
आ" ल"ा 7| 5न च|रl क|,
पुन: नया 5ितहास बना7,
व€त िवकास का है ब¯Uु ये,
अपना ना पिरहास बना7.
3"ा7 सूर7 ñाि¯त का नव,
7ूता खlच के मार| H5या.
7ीपक 'म7ाल'
(4) मु5े अब 7ा" 7ाने 7|
बहुत स|या रहा अब तक,
मु5े अब 7ा" 7ाने 7|,
अरे ^वाबl के 7ह7ा7l,
रl7नी रास आने 7|.

बहुत स|या रहा अब तक,
5ू5 के 7ािमयाने म,
7 सच के आसमl अब त|,
7रा सा पास आने 7|.

म र|या हू तेरे 7ु:ख म,
कलम Hी आ7माया है,
िमõाने 7| तेरे 7ु:ख मl,
खƒ" मु5क| 35ाने 7|.

बहुत खु7 क| स¯हाला था,
Uैय का ब|लबाला था,
हावी हैवl ह| "ए अब,
€यामत मु5क| •ाने 7|.

पाप है बõ "या 5तना,
मैली "ं"ा ह| "यी,
लाने 7| नया यु" अब,
नयी "ं"ा बहाने 7|.

न "म करना 7रा Hी तुम,
7| नरHuी म ह| 7ा3ं ,
5न 7ैतानl के बेõl से,
Hूख अपनी िमõाने 7|.

7ान 7| कर "ए अप",
मान तेरा बõाने म,
नहl व| आएं "े वापस,
नए कुछ नाम लाने 7|.

तेरी सl"ंU मु5क| मl,
7| ना "lरव ि7ला पा3ं ,
ख7ी ह|"ी मlत 7ु„न,
"ले 3सक| ल"ाने 7|.
7ीपक 'म7ाल' ¤….¤×.¤‚
5-~"7ल~
नाम िलख िलख के तेरा िमõा 7ेता हू,
खु7 का चेहरा ही खु7 से िछपा लेता हू.
7ेख ले न क|5 तु5क| 5न आखl म,
5सिलए सबसे न7र बचा लेता हू.
बेव7ा तु5क| कहना मुनािसब नहl,
क4 अपनी व7ा की स7ा लेता हू..
कया मु€äर है कया है मेरे हाथ म,
लेके खं7र लकीर बना लेता हू.
पूछता है क|5 7ब तेरे बारे म,
ह|के खाम|7 पलक ि"रा लेता हू.
7ीपक चlरिसया 'म7ाल'
6-~"7ल~
कHी व| सूर7 से िमलाता था न7र ,
अब न7र खु7 से िमला5 नहl 7ाती.
बात करता था कHी "र7 से बा7ल की,
अब स7ा खु7 की ही सुनायी नहl 7ाती..
]से Hी"ी ह पलक अबके सावन म,
लाख तू7l से व| सुखा5 नहl 7ाती.
तेरे आ"न म िबछा के आया था 7|,
व| िकरच आख से 35ा5 नहl 7ाती.
तेरी या7l क| सं 7|ने की 7"ह िमलती नहl,
नापाक ि7ल म ये खु°बू बसा5 नहl 7ाती.
चl7 आये कHी 7| तेरी "ली त| कह 7ेना,
7|÷ती चl7नी से अब िनHा5 नहl 7ाती.
5स क7र तुम से ख7ा ह| "या व| 'म7ाल',
की व7ह-ए-खाम|7ी Hी बता5 नहl 7ाती..
7ीपक चlरिसया 'म7ाल'
7- खूंखार हुए कlरव के 7र
खूंखार हुए कlरव के 7र,
"ा°डीव तेरा कयl ह¯का है?
अ7ुन र" र÷ता 7ेख रहा,
िव"ाम नहl 5क पल का है.
तमतमा 35| सूर7 से तुम,
खलबली खलl म कर 7| तुम,
िव¯वं स रचा ि7सने 7" का,
3सक| आतं क से Hर 7| तुम.
ये 7ुिनया ि7ससे कlप रही,
3सक| आ7 कं पा 7| तुम.
िक ह7 ह7l की U¯म हु†,
तुम 7ेख| Uैय Hी छलका है. खूंखार हुए कlरव के 7र, "ा°डीव तेरा कयl.....
u" Hर Hी 7| तुम 5हर "ए,
ये Uरा म¯यु न पा 7ाये,
बा÷7 यहl 7ैतानl का,
मानव 7ीवन न खा 7ाये.
अमत 7ेवl के िह÷से का,
7ै¯यरा7 न पा 7ाये,
पी7ा 77य की असा¯य हु5,
आसू हर ने7 से •ुलका है. खूंखार हुए कlरव के 7र, "ा°डीव तेरा कयl.....
कयl ख7े अHी तक 5"े हुए,
अब का¯हा क|5 न आये"ा,
थाम| अ‡l की बा"ड|र,
ना ¯व7रuक ही आये"ा.
तुम ÷वयं पू" ह| "ए पाथ ,
अब "ीता न क|5 सुनाए"ा,
7| 7वालामुख ये 7हक 35े तुम,
÷वि"म Hारत ि7र कल का है. खूंखार हुए कlरव के 7र, "ा°डीव तेरा कयl.....
7ीपक 'म7ाल'
8- 7Hु कर Hी 7| िव¯वं 7 7हl.
हय ल7ा "5 अब ला7 यहl
है हर म÷तक 7मसार यहl,
बेõी क| Uतरा बाबुल से
7Hु कर Hी 7| िव¯वं 7 7हl.
7| नक यही ि7खलाना था
अ¯छा था क|ख म मर 7ाना,
सब 7ेह म िसमõ "ए बं Uन
बस िर°ता नर-नारी ही 7ाना.
7| घात करे अपने खू पे
3सक| 7ु"l का स¯मान कहl?
7Hु कर Hी 7|.......
हम Hूल "ए "lहरबानl?
या कथा ि7वा की या7 नहl
कया "|रा-बा7ल की तलवार
मयl7ा कुल की या7 नहl?
7õती है छाती "ं"ा की
र|ती है Hरत की ÷ह यहl.
7Hु कर Hी 7|.............
ि7व-÷प पे ल"े कलंकl क|
कुचल-कुचल के ना7 कर|,
नापाक हु5 5स Uरती क|
खल-रकत से ि7र से सा7 कर|.
7| हुआ िव‡-"ु' अपराUी,
आएं "े ि7र ना राम यहl.
7Hु कर Hी 7|..............
7ीपक 'म7ाल'
9- 3नका अ7ी7 बन के रहा, 7ब तक हवा7ं सा था म,
सबक| न°तर सा चुHा, 7| तू7l के माि7क ह| "या.
मुि°कल मुि°कल न थl 7ब तक 7राबी म रहा,
नीलाम म 3स ि7न हुआ ि7स ि7न से आि7क ह| "या.
10- िकतना यहl िकससे िमला ये 7ानना 7ाय7 नहl,
ये 7ानना कुछ कम नहl की हर त7ुब से िमला.
3नसे 7ब Hी म िमला त| एक अ7ूबे की तरह,
7|÷त बन- बन के कHी, कHी रकीब बन के िमला.
11- तुमक| ख|ने का व| डर था, ि7ससे म डरता रहा,
मेरे डर क| 7ेख तुमने कायर ही बस सम5ा मु5े.
7ब Hी ि7ल के हाल क| मने ल17l म कहा,
तुमने सम5ा त| म"र 7ायर ही बस सम5ा मु5े.
12- अब Hी ि7ल म है तू, न7रl से Hले 7ू र हुआ,
व€त पे खाम|7 रहा, ये मु5से एक कसूर हुआ.
कुछ असर-ए-हालत था, कुछ खताएं मेरी,
7| मेरे मरहम से 7^म तेरा नासूर हुआ.
तेरी 3¯7त के कािबल म कHी था ही नहl,
न 7ाने ि7ल मेरा कयl, ि7र ये म7बूर हुआ.
7ीपक 'म7ाल'
13- कैसे यकीन ि7ला3 तु¯हे
कैसे?
हl कैसे यकीन ि7ला3 तु¯हे
तुम ही ¯यार ह| मेरा,
हर साल, हर महीने
हर ि7न, हर पहर
हर पल,
तुम ही 5¯ते7ार ह| मेरा.
तु¯ही त| ह| ि7सके िलए,
म सlसl क| स¯हाले हुए हू,
अUखुली आखl म कुछ,
रं "ीन सपने पाले
तु¯ही त| ह|,
7| 7मीन से बlUे है मु5े,
Vर 3स 7मl के सर का,
तु¯ही िव÷तार ह| मेरा.
कैसे?
हl कैसे ..........ह| मेरा.
तु¯हारे ही सपनl के ितनकl से,
मने नlव रखी है
अपने घlसले की,
Vर तु¯हारी आखl की चमक से
िमलती है
खुराक हlसले की.
वनl 5ू 5 पे,
हl पुराने 5ू 5 पे
नए घlसले नहl बनते,
बनकर के हl5 मेरे
तु¯ही त| 57हार ह| मेरा.
कैसे?
हl कैसे ......ह| मेरा.
7ीपक 'म7ाल'
14- न 7ाने õू õते िकतने 5ि^तयार 7ेखे ह,
हरेक चेहरे म िछपे चेहरे ह7ार 7ेखे ह.
तू बेव7ा िनकला त| कया, न7र िमला के बात कर,
5न िन"ाहl ने तु5से Hी ब7े "ुनाह"ार 7ेखे ह.
7ुñ है की तुमने खं7र ि7खाया त| सही,
वनl "ुल7÷तl म िछपे, खं7र के वार 7ेखे ह.
अबकी 5¯सl से 7ु°मनl है कर बै5े 'म7ाल',
िक आखl म अपने काितल के आं सू Hी चार 7ेखे ह.
7ीपक 'म7ाल'
15- ि7¯7"ी तू न खु7 क| सम5ा सकी,
मlत के डर ने तु5क| सम5ा ि7या,
ि7सक| Uेला सम5 के था 7का कHी,
7lहरी ने 3से हीरा बतला ि7या.
यूं न किहये िक 5|कर से कया 7ाय7ा,
हमक| 5|करl ने स¯हलना िसखला ि7या.
ना खु7ा सारी 7ुिनया म आया न7र,
बं 7 आखl ने ि7ल ने व| ि7खला ि7या.
मु5से पू छा िकसी ने 5बा7त का 7र,
मने रा÷ता तेरे घर का ि7खला ि7या.
7ीपक 'म7ाल'
16- मु5े ि7र Hी तेरी 7'रत है.
यहl सब बहुत खूबसूरत है
पर मl,
मु5े ि7र Hी तेरी 7'रत है.
आसमान नीला है नीले °याम की तरह
Vर बहुत सारी है हिरयाली.
यहl त| प¬े Hी पत57 के रं "-िबरं "े ह|ते ह,
Vर िमõõी Hी 5नके आ"न की
सु¯7रता की मूरत है.
पर मl,
मु5े ि7र Hी तेरी 7'रत है.
सु¯7र ह|ता है 3ि7यारा,
7र सु¯7र 7ीवार Hी,
¯यारी है िचिडयl की ब|ली,
ब¯चे ह 7ू लl के 7ैसे
Vर 7ू ल 5¯5Uनु1 7ैसे.
घर हl या बा7ार हl सबकी
चमकीली सी सूरत है.
पर मl,
मु5े ि7र Hी तेरी 7'रत है.... 7ीपक 'म7ाल'

10 MARCH 2009
17-ििि िििि िि ििि िििि
िि िि िििि ििि ििि
िि िि ििि िि
िि िि ििििििििििि िि ििििि ििि,
िि ििि,
िि ििि,
िि ििि िििि ििििि ििििि.
िििि ििििि िि,
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िि िििि िि िििििििि िि िििििि िि.
िि ििि िििि िि िििि,
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िि िििििि िि िि िििि
िि िििि िि ििि िििि.
िि िि ििि िि ििििि,
िििि िि ििि ििििि िि.
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िििि िििि ििििििि
ििि ििििििि िििििि, ििििििि ििििििि,
ििििििि ििििि, ििििििि िििििि,
िििििि ििि, िििििि िििि,
िििििि िििि, िििििि िििि,
िििििि िििि िि िििििि.
ििि िििि िििि ििि ििि िि
ििििि ििििि िि
िि िििि िि ििििििि िि िििि
िि िििि िि ििि िििि,
िि िििि िि ििि िििि.
िि िि ििि िि ििि
ििििि ििि ििििि िि िििि,
िििि ििि िि ििििि ििििि
िििि, ििि िि िि िि,
िि ििििि ििि ििििि ििििि
िि िििि
िििि ििि ििििि िि?
िि .......
िि ििििि िि ििि ििि
िििि ििि िि,
िि ििििि िि ििि
ििि ििि ििििि ििि.
िि ििििि िि ििििि
िििि ििि ििि िि,
िि िि िि िििि िि ििििििि िि िििििि
िि िििि ििि िि िि िििि,
िि िििि िि ििि िििि.
ििििि ििििि िि ििििि,
िि िि ििि
िििि िििि िििि,
िििि ििििििि िि िििि
िि िि ििििि ििि िि ििि,
िि िि िििि ििि ििि.
िि िि िि ििििि िि ििि िििि िििि,
िििि िि ििििि, ििििििि िि
िि िििि िि ििि िििि,
िि िििि िि ििििििि िि िििििि
िििि िििि िि ििििि,
िििििि िि ििि ििििििि
िि िििि िि ििि िििि
ििि िि ििि
ििि िििि िि ििि िििि
7ीपक 'म7ाल'
18-िििि िि िििि िि?
िििि िििि िििििि िि िििि िि िििि िि?
िििििि, ििि िि ििि िि,
िि िि िि िि ििि िि ििििि
िि ििििि िि िििि िििि िि?
िििि िििि िििििि िि.....
िििििि िििि िि ििििि ििि,
ििि िि िि िि िििििि,
िििि िििििि िि ििि ििि,
िििि िििि ि िििििि.
िििि िििि ििििििि िि िििि िि िििि िि?
िि िििि-िििि ििििि ििििििि िि,
ििििि ििि िििििि िििि,
िि ििििि िि िििि ि िििि,
ििििि िि िििििि ििि.
िििि िििि ििििििि िि िििि िि िििि िि?
7ीपक 'म7ाल'
19-बेर|7"ार
म 5क बेर|7"ार हू,
म 5क बेर|7"ार हू.
न7र म 7ुिनया के बेकार हू,
पर बेकारी के आलम से 7¯मे
77 का त7ुबकार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
सब मl"ते ह अनुHव,
पर
अनुHव के िलए
क|5 नlकरी नहl 7ेता.
5सीिलए म बे"ार हू,
म 5क बेर|7"ार हू.
ख|खले वा7l के
Uख|ल से 3प7ी
7े7 की
ि7uा-7"ाली की
एक हार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
5ू5ा मüार हू,
बरसात म
õू õी हु5 छत क| तकते,
िकसी
बाप का 5¯ते7ार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
खाम|7 है 7|,
कुछ कह नहl सकती
ि7"र के õुक7े से,
77 म त7पती 3स
बीमार मl का "ुनह"ार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
7|
मु5म तला7 बै5ी है
सपने क5 अपने ,
•लती 37 •|ती हु5
3स ना7ान का म ¯यार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
7ू र के
Vर करीब के,
स¯बि¯Uयl की
न7रl म,
म प•ािलखा "ंवार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
7| चहकते थे
सं" खुि7यl म,
अब
3न यारl की
3पेuा का ि7कार हू.
म 5क बेर|7"ार हू.
7ेखता नहl म
आ5ना,
कैसे सामना
क' खु7 का?
म खु7 का कसूरवार हू.
म 5क बेर|7"ार हू......
7ीपक 'म7ाल'
20- म|u
पिरñमा
करते थे 7>,
अUेरे मन के
क|õर के,
3¬र क|5 िनकले साथक,
ि7सक|
हिथया के 7ा¯त क',
िवचिलत 77य
संत¯त क'ˆ
िकस राह क|
म पा 7ा3?
िकसपे
कर िव‡ास चला 7ा3?
िकसक| H÷,
अंक म म,
7ीवन-77न या 7"-पी7ा?
क' नर-सेवा या
नाराय"?
बनू िकसका क¬¯य-पराय"?
चलू पथ
म|u 7ाि¯त का म,
या पी7ा 7ीनl की ह÷ हरी?
"ुथा हुआ म
7ंिथ म,
था अंतमन õõ|ल रहा बै5ाˆ
सहसा िघर आये मेघा
आबनूस रं " चõे हुए,
"र7े,
बरसे,
कlUी िब7ली,
मु5े व‰ 5¯5 का या7 हुआ,
¯या" 7Uीिच का सार हुआˆ
तब Hान हुआ 7|
करनी का,
7ीते 7ी म|u 7ा¯त हुआˆ
7ीपक 'म7ाल' 24.05.09
21- ििििि ििििििि िििि
मु5से पू छे"ा खु7ा,
कया िकया तुमने
7मl पे 7ाके,
आ7मी का तन पाकेˆ
म तु5मे •ू ं•ता रहा
7"ह अपनी,
Vर तू खु7 था,
मु5े प¯थरl म 5हरा केˆ
अपनी िससिकयl के 7|रl म,
आह Vरl की
ना सुन पाए,
सपने बुने त| सतरं "ी म"र,
अपने िलए ही बुन पाएˆ
7| िलया सबसे
तु¯हे या7 नहl
Vर 7ेके थ|7े का िहसाब,
Hूल नहl पाएˆ
कया क' म
बना के व| 5¯सl,
काम 5¯सl के 7|,
कर नहl पाएˆ
मने चाहा था,
तुम िलख| नसीब 7ुिनया का,
तुम रहे बै5े,
7|1 अपने नसीब क| ल"ा केˆ
या7 मु5क| त| िकया,
िकया म"र घबरा केˆ
बlõ के मु5क| क5 नामl म,
लlõ आये ह| 7हर 7ैला केˆ
िििि 'िििि'
22- Nazm
बे7ार म र|ती रही, व| बे-5¯तेहl हसता रहा.
व€त का हर एक क7म, राहे 7ु¯म पर बõता रहा.
ये स|च के िक आच से ¯यार की िपघले"ा कHी,
म म|मि7ल कहती रही, व| प¯थर बना 5"ता रहा.
3सक| खबर नहl थी िक म बेखबर नहl,
म अमत सम5 पीती रही, व| 7ब Hी 7हर 7ेता रहा.
म बारहा कहती रही, ए स4 मेरे स4 कर,
व| बारहा 5स स4 िक, ह7 नयी "õता रहा.
था कहl आसl यू रखना, कायम व7ू7 पर7ेस म,
पानी मु5े "ं"ा का लेिकन, िह¯मत बहुत 7ेता रहा.
ब¯U िकतने •ं" के, ल"वा ि7ए 3सने म"र,
'म7ाल' तेरा 7ेम मु5क|, हlसला 7ेता रहा.
7ीपक 'म7ाल'
23-Nazm-
िक म त| तब Hी पा"ल था,
िक सम5ा नहl था 7ब
हमारे ि7ल िक हलचल क|,
िक 7ब म पõ न पाया था
िन"ाहl की िकताबl म,
हसरत-ए-म|ह¯बत क|,
तब तुमने ही आके त|
पा"ल मु5े नवा7ा था.
िक म त| तब Hी पा"ल था
िक 7ब था 5°क क| सम5ा,
7माने क| Hुलाया ि7र
म खु7 क| Hी Hुला बै5ा,
सHी 7ुिनया ने िमल के तब
7ीवाना पा"ल कह डाला.
िक म त| अब Hी पा"ल हू,
तेरा 7ामन रहा थामे
म पूरे 7|र से कसके,
म"र ख|ना प7ा तुमक|
बुरे हालात म 7स के,
कया अब त| खु7 क| ही मने
पा"ल सच म बना डाला.
अब 5क बात का 5तना
7रा 5¯सा7 कर 7ा7,
िक पा"ल कब म 7या7ा था?
िस7 5तना बता 7ा7.
7ीपक 'म7ाल' 9.8.09
Important
लहू पहा7 के ि7ल का, न7ी म 7ािमल है,
तु¯हारा 77 हमारी Uु7ी म 7ािमल है.
तुम अपना 77 अल" से ि7खा न पा7"े,
तेरा 7| 77 है व| मु5ी म 7ािमल है.
"ु7रे ल¯हl क| म अकसर •ू •ती िमल 7ा3"ी,
ि7÷म से Hी म तु¯हे अकसर 7ु7ा िमल 7ा3"ी.
7ू र िकतनी Hी रहू , ख|ल|"े 7ब Hी आख तुम,
म िसरहाने पर तु¯हारे 7ा"ती िमल 7ा3"ी.
घर के बाहर 7ब क7म रख|"े अपना एक Hी,
बनके म तुमक| तु¯हारा रा÷ता िमल 7ा3"ी.
मु5पे मlसम क|5 Hी "ु7रे 7रा Hी डर नहl,
खु°क õहनी पर Hी तुमक| म हरी िमल 7ा3"ी.
तुम ^यालl म सही आवा7 7ेके 7ेखना,
घर के बाहर म तु¯ह आती हु5 िमल 7ा3"ी.
"र तस¯बुर Hी मेरे 5क 7ेर का तुमने िकया,
सुबह घर िक 7ीवारl पर तु¯ह िलखी हु5 िमल 7ा3"ी.
'बीती Uु7ी'
24- मन चंचल ""न पखे÷ है
मन चंचल ""न पखे÷ है,
म िकससे बlUता िकसक|.
म कयl 5तना अUूरा हू,
की िकससे चाह है मु5क|.
व| बस हालात ]से थे,
िक बुरा म बन नहl पाया.
म 7िर°ता हू नहl प"ली,
क|5 सम5ाए त| 5सक|.
7माने की हवा है ये,
ये ÷हानी नहl साया.
म"र ताबी7 ला 7| तुम,
तस¯ली "र िमले तुमक|.
3से ल¯हे डराते ह,
कल की "म की रातl के,
है सूर7 हर घ7ी 7ेता,
Uु7ी की रl7नी ि7सक|.
7ीपक 'म7ाल'
25-
मीलl साथ चले म"र
व| कुछ Hी कह न पाए थे,
कहने क| र|7 िमलते थे
म"र हम िमल न पाए थे.
U¯म स7र ह|ने क| था,
हमस7र ख|ने क| था,
हl5 खाम|7 थे तब Hी,
अ°क Hी बह न पाए थे.
अब अतीत म 7ाके
ख|या मीत तकता हू,
अUेरे म साये से
आस िमलन की रखता हू.
म घõ Hरा हुआ 7ल से
हर पल थ|7ा िरसता हू,
कHी 7ु7ा नहl है 7|
म एक ]सा िर°ता हू.
म एक ]सा िर°ता हू..
7ीपक 'म7ाल'
26-
Uुआ-Uुआ सा न7र आया सब,
3सने मु5क| था 5ुकराया 7ब.
5तना बेबस के 7ैसे खू ही नहl,
ि"रे ब7न क| 7मl से 35ाया 7ब.
सब अUूरा सा न7र आया था,
चl7 क|रा सा ^वाब लाया 7ब.
रं " 7ू लl का ह| "या का7ुर,
िकतना 7ीका सा 77क छाया तब.
7ीपक 'म7ाल'
27-
ल| यहl 5क बार ि7र, बा7ल क|5 बरसा नहl,
तपती 7मl का ि7ल यहl, 5सबार Hी हर1ा नहl.
37ते हुए बा7ल के õुक7े , से मने पूछा यही,
कया हुआ कयl ि7र से तू, 5स हाल पे िपघला नहl.
तेरी व7ह से ि7र क5, 7lसी "ले ल"ाय"े,
अनाथ ब¯चे Hूख से, ि7र पेõ क| 7बाय"े.
मl ि7से कहते ह व|, खेत बेचे 7ाय"े,
म7बूिरयl से तन क5, बा7ार म आ 7ाय"े.
ि7र र|िõयl के च|र िकतने , Hूखे पीõे 7ाय"े,
ि7र क5 मासूम बचपन, पल म 7वl ह| 7ाय"े.
7ीपक 'म7ाल'
28-
कया खूब पायी थी 3सने अ7ा,
^वाब त|7े क5 आंिU7ं की तरह.
कतरे "ए क5 पिरं 7l के पर,
सबक| खेला था व| बाि7यl की तरह.
हlसला नाम से रब के 7ेता रहा,
V 7ैसला कर "या काि77ं की तरह.
Uास बनने के ^वाब खूब बचे म"र,
करके छ|डा हम हाि77ं की तरह.
सािहलl क| िमलाने की 7ुंिब7 त| थी,
खु7 का सािहल न था माि57ं की तरह.
ि7नक| ि7ल से ल"ा 'म7ाल' 7ायर बना,
है अब ल"ाता 3¯ह काि77ं की तरह.
7ीपक 'म7ाल'
29-
] मlत!
म 7रवा7े पे खडा हू,
तुम आ7 त| सही,
म Hा"ूं"ा नहl.
कसम है मु5े 3सकी,
ि7से
म सबसे 7या7ा ¯यार करता हू,
Vर 3सकी Hी
7| मु5े सबसे 7या7ा ¯यार करता है.
या 7ाय7 7|नl.....
एक ही हl.
एक ]सा 7^स
या ]से 7| 7^स......
7| आपस म "ƒडम"ƒड ह..
म"र 7| Hी ह|
है त| ¯यार से 7ु7ा हुआ ही न.
वैसे Hी...
"ि"त के िहसाब से
अ बराबर ब
Vर ब बराबर स
त| अ बराबर स ही हुआ न....
7| Hी ह| यार
म"र सच म
3न 7|नl की कसम
3न 7|नl की कसम, म Hा"ू"ा नहl.
कुछ ल|" कहते ह िक-
'ि7ं 7"ी से ब7ी स7ा ही नहl'
अरे
त| तुम त| 5नाम हु5 न
Vर Hला 5नाम से
कयl कर म Hा"ूं"ा?
Vर ि7र व| 5नाम 7|.....
आिखरी ह|
सबसे ब7ा ह|,
ि7सके बा7 िकसी 5नाम की 7÷रत ही न रहे..
3ससे Hला म कयl Hा"ूं"ा?
5सिलए
] मlत....
तु¯हे
वा÷ता है खु7 का,
खु7ा का
आ7 त| सही
म Hा"ूं"ा नहl.....
7ीपक 'म7ाल'
30-
ि7ल की õीसl क|, ि7ल म 7बाये रखना,
ल|" आएं "े 7ब, 7^मl क| िछपाए रखना.
5क तब÷सुम त| रखना हl5l पे 7माने के िलए,
व€त 7÷रत के िलए, आं सू Hी कुछ बचाए रखना.
छला "या, म छला "या
अपनl के हाथl छला "या,
7| 7ू लl का न िमला मु5े,
पथ मं ि7ल तक चलने क|,
अं"ारl की 5क राह चुनी,
ि7स पर म चलता चला "या.
यू त| 5क ¯यासा पनघõ का
Vर तनहा क|5 7मघõ का,
िमलना त| मुि°कल ह|ता है,
पर िक÷मत ]सी िमली मु5े,
िक 7ीतल 7ल Hी 7ला "या.
छला "या म छला "या.
रात पूस Vर चं7र पूनम,
ि7र Hी मेरा Hा" अह|,
3सका ब7lला ताप मेरे,
क|मल अरमानl का 5क 5क
7मा हुआ िहम "ला "या.
छला "या म छला "या.
हाल-ए-ि7ल ि7स ि7लवर से,
हम सुनते Vर सुनाते थे,
सं" रा" व7ा के "ाते थे,
हय ि7ल म रहकर व| ि7ल क|,
कुछ 7^म ि7ला के चला "या.
छला "या म छला "या.
7ीपक 'म7ाल'
31 -"7ल-
ये पिरं 7ा 5न 7र^तl से, पूछता रहता है कया,
ये आसमl की सरह7l म, •ू ं •ता रहता है कया.
7| कHी ख|या नहl, 3सक| तला7 कया करना,
5न 7रl क| प¯थरl क|, चूमता रहता है कया.
ख|लकर तू 7ेख आख, ले रं " Uु7ी के तू िखला,
"म क| मु€äर 7ान के, यू 3ं घता रहता है कया.
क|5 मं तर नहl ]सा, 7| आ7िमयत ि7ला सके,
कान म 5स मु7 के, तू 7ू ंकता रहता है कया.
आए"ी कहl व| खु7बुए , अब 5नम 'म7ाल',
7रारl म 7रके िर°तl की, सूंघता रहता है कया.
7ीपक 'म7ाल'
32- व| आतं कवा7 सम5ती है ...
व| 7ब घर से िनकलती है,
खु7 ही
खु7 के िलए 7ुआ करती है,
चाय की 7ुकान से 35े कõाul के 7|लl म,
पान के •ाबे से िनकली सीिõयl की लपõl म,
र|7 ही 5ुलसती है.
चlराहl की घूरती न7रl की "|िलयl,
3से हर घ7ी छलनी करती ह.
आतं कवा7!!!!
अरे 5ससे त| तुम
आ7 खl7 खाने ल"े ह|,
व| कब से
5सी खुराक पे 7ीती-मरती है.
तुम त| आतं क क|
आ7 सम5ने ल"े ह|
आ7 डरने ल"े ह|,
व| त| सि7यl से डरती है,
7मl पे आने की 7ä|7ह7 म,
िकस-िकस से िनपõती है.
तुम 7ान 7ेने से डरते ह|
पर व|
आब÷ छुपाये ि7रती है,
कयlिक व| 7ान से कम Vर
5ससे 7या7ा ¯यार करती है.
तुम त| •ंके चेहरl Vर
असलहे वाले हाथl से सहमते ह|,
व| तु¯हारे खुले चेहरे,
खाली हाथl से िसहरती है.
तुम मlत से बचने क| िबलखते ह|,
व| ि7ं 7"ी पे िससकती है.
तु¯हे ल"ता है...
Vरत अUबार नहl पõती त|..
कुछ नहl सम5ती,
अरे चाहे िपछडी रहे
ि7uा म म"र,
सŠयता म
आ7मी से क5 क7म आ"े रहती है.
5सिलए
हl 5सिलए,
हमसे क5 "ुना 7या7ा,
व| आतं कवा7 सम5ती है
व| आतं कवा7 सम5ती है....
7ीपक 'म7ाल'
33- व€त के ब7लाव सं " िर°ते Hी ब7लने ल"े,
7हl क| 7l 7ी ि7सने 3से 'माल' कहने ल"े,
5क बन "5 7ु"l त| डरने ल" "ए 3ससे,
बाकी सबके साथ हरकत ि7र वही करने ल"े.
7ीपक 'म7ाल'
समप"
मन समिपत, तन समिपत
Vर यह 7ीवन समिपत,
ि7य तु¯हारा ‹" बहुत है म अिकं चन,
िक¯तु 5तना कर रही तुमसे िनवे7न
¯यथा अं तस की सुना3 7ब ¯यिथत हू,
कर 7या ÷वीकार लेना यह समप".
मान अिपत, 7ा" अिपत
रकत का क"-क" समिपत,
÷वŒ अिपत, 7> अिपत
आयु का u"-u" समिपत.
अपने 7ीवन क| 7लाकर के तुमने ,
चाहा खुि7यl का मु5े अ¯बार 7ेना,
त|7 7ू "ी म|ह का बं Uन, कह| तुम,
छ|7 7ू "ी चाहत तु¯हारी, "र कह| तुम.
पर आ7 सुन ल| ि7य मेरे अंतस की पी7ा,
त| यथावत मान लूं"ी,
आ7 पूरा ह| "या मेरा समप"...
'बीती Uु7ी'

34- वहl से स7 रहा हू म.....
ििि ििििि
िि िििि िि िििििििि ििि,
ििििििि िि िििि
म ल|कतं 7 हू.
तं 7 हू, ÷वतं 7 हू 5ि7 म म"र
75ल म
आ¯मा से परतं 7 हू.
कहने क| बõ रहा हू म.
पर 77l म न 5lिकये
वहl से स7 रहा हू म.
ल|क क| Uकेलता
परल|क की म राह म,
कुछ मुसीबतl की आख म
"7 रहा हू म.
हू त| म कुवर क|5
सल|ना एक चl7 सा,
पर 7ह"l की छाया से
िपछ7 रहा हू म.
म अ‡ हू महाबली,
पर सामने न7ी चõी
•7l की खेप की,
5ू5 की 7रेब की,
7| घु7सवार मेरा है
3सक| ि7ñ रहती है
िस7 अपनी 7ेब की,
बस 5सिलए िबन बõे,
तõ पे अ7 रहा हू म.
77l म न 5lकना
वहl से स7 रहा हू म...
7ीपक 'म7ाल'
35- सािबत करने के िलए......
बा7 िवरह के क5 बरस के,
िकया "या था 3से ख7ा 5क सवाल की तरह,
Vर 7वाब के िलए
था कू 7ना प7ा अि¹न म
अपने क|
कं चन सािबत करने के िलए.
कHी थी ल"ी 7lव पे
5क व÷तु की तरह मह7,
Vर हारी Hी "यी,
ला7 3सकी 3तारी Hी "यी,
घसीõा "या 3से,
7ासी सािबत करने के िलए.
स7ैव 3सने ही िकया तप,
अपने आरा¯य पित क| पाने क|,
कHी H÷म हु5 थी
अि¹नकु°ड म
कयl???..िस7...
समप" सािबत करने के िलए.
थी म¯यु7ेव से िH7ी कHी,
व| राह म थी अडी तHी,
लाने क| वापस 7ा"...
िन7 7ा"ि7य के
÷वयं क|...
सती सािबत करने के िलए.
हे पु'1वा7ी मानिसकता के 5ं डावर7ारl!!!!!!!!
5क बुरी खबर है आपके िलए,
िक नारी अबतक हारी नहl,
हl Vर अब Hी ख7ी है,
तुम 7| चाह|....
व| सािबत करने के िलए.
तुम समं7र ह| "ए,
व| कतरा ही रह "यी..
ि7र Hी डरते ह| कयl???
िक व| कहl 35 न 7ाये??
तु¯हे कतरे का....
क77ार सािबत करने के िलए.
िििि 'िििि'
वह कहना चाहती थी िक.....
करवõ ब7लते घं õl ह| "ए म"र सुप"l क| चैन कहl? एक7म अकेली प7 "5 थी सुप"l 7ैसे 7ीवन का लŽय ही समा¯त ह| "या
ह|. 3सके Hीतर छõपõाहõ थी, एक मं थन चल रहा था. 7ीवन का 3äे°य कया है? 7| 7ीिवत है 3से 7ीिवत रहने का अिUकार कयl
नहl? वह घुõ-घुõ कर कयl रहे, साथक 7ीवन 7ीना कया पाप है? साथक 7ीवन!!!!!
वह अपने 7ीवन के "ु7रे ¯× सालl का लेखा-7|खा करने म ल" "यी Vर स|चते स|चते एक पुरानी िकताब के कुछ सुनहरे, कुछ
काले प7े खुलते चले "ए 3सकी आखl के सामने .
सूर7 की पहली िकर" के साथ 7ब एक कली अंकुिरत ह|ती है त| अलसा5 बं 7 प7ी सी 3सकी क|मल पि¬यl अपनी आख ख|लती है
तािक 5स सि7 से अपने सू7 7|7 सके. तब वह यह नहl 7ानती िक िकतने िन7यी हाथ बõ"े 3से न7 करने क|, िकतने हवा के
5lके 3सके िलए खु7 क| तू7ान बना ल"े Vर 3से 37ा7ने के िलए 35"े. ये क|5 मन"õंत िक÷सा नहl बि¯क ]सा ह|ता Hी है िक
कHी-कHी 3स कली के सं रuक Hी कली के अरमानl िक क5 नहl करते. कHी 577त, कHी परं परा, कHी 5ू5े आ77lं त| कHी Uम के
नाम पर 3से रl7ा 7ाता है. म"र ि7र Hी वह िखलती है, अनचाही Vर 3पेिuत सी अपनी ही बõत से सहमी हु5, मlन, नतम÷तक सी.
Hारतीय पिरवे7 म बेिõयl िक परविर7 कुछ ]से ही ह|ती है अमूमन वह िकसी पा•ा¯य सं÷कित से 7ेिरत पिरवे7 का िह÷सा न ह|. Vर
5¯ही अनचाही Hारतीय मानिसकता के ‹"ा¯मक पहलू से 7ेिरत एक पिरवे7 म पली बõी थी सुप"l Vर 5स 77 क| 3सने "हरे से
अपने बचपन से ही महसूस िकया था. 3सने 5सी बात क| अपने 3पर 3तारते हुए Hी अपने आप क| एक चंचल सी ल7की, 7| एक
सं7ी7"ी की चा7र म िलपõी थी, म त¯7ील कर िलया था. सुप"l हमे7ा अपनी कलास म अ¯बल रहती थी Vर 5स तरह वह आ"े ब•ती-
ब•ती ‚वी कलास म पहुच "यी.
¯यार करने िक कया क|5 37 ह|ती है, ये ि7ल से क|5 पूछे त| Hला. ह|7 स¯हालने से लेकर 7ब तक आख नहl मुं7 7ातl तब
तक कHी Hी ह| सकता है Vर सच त| ये है िक 5स 7ु÷आती ¯यार की 7| खासकर िक7|राव÷था म ह| खािलस ¯यार के अलावा िकसी
अ¯य7 Hाव: का ÷थान "l• ही ह|ता है. यह ¯यार बहुत ही पिव7 ह|ता है... िन°छल.. हl यही वह 7¯7 है ि7सका बयl करने के िलए 3स
िन°छल 7ेम के बारे म स|चती है त| िचरा" का खूबसूरत व7ू7 3सकी आखl के सामने आके ख7ा ह| 7ाता है. िचरा", एक बहुत ही
मासूम, सीUा व कम ब|लने वाला ल7का. सुप"l के साथ म पõते रहने के बा7 Hी 7|नl एक 7ुसरे से ल"H" अ¯7ान थे. सुप"l के बाबा
िचरा" के चाचा क| अं 7े7ी सािह¯य िक õयू7न प•ाते थे, स| हुआ ये िक एक ि7न 3सके बाबा ने 3ससे िचरा" क| ये कहने के िलए
ब|ला िक व| अपने चाचा क| कह 7े िक बाबा ने 3¯ह बुलाया है. िचरा" के ¯यिकत¯व से एक7म नावािक7 सुप"l के िलए ये बहुत िह¯मत
का काम था, ि7र Hी कैिम÷[ी 7य|"7ाला म स|िडयम हा5•|कसा5ड की एक ब|तल के आ7ान-77ान के बहाने 3सने U7कते ि7ल से ये
बात 3ससे कह 7ी. पर िचरा" िबना िकसी 7ितिñया के चला "या. सुप"l क| अपने आप पे बहुत "ु÷सा आया की एक "ूं"े से बात करने
की 3से कया 7÷रत थी Vर 7ाय7 3सने 5स तरह के ¯यवहार की आ7ा ही नहl की थी. पर¯तु 7ाम क| िचरा" के चाचा क| घर पर
7ेख कर 3से एक सुख7 हैरानी हु5 Vर पूछने पर पता चला िक यह बात 3नसे िचरा" ने ही कही थी. यह थी 3नकी पहली
मुलाकात Vर पहली ही मुलाकात म िचरा" सुप"l के ि7ल म 3तर "या. Uीरे-Uीरे वह िचरा" िक बहुत अ¯छी 7|÷त बन "यी. 7ाय7
िचरा" की Hी मं 7ा 5स िर°ते क| आ"े बõाने की रही ह|"ी Vर 3न 7|नl के 5स िर°ते क| बनाये रखने के िलए िचरा" की िच7कला की
कािबिलयत ने एक सेतु का काय िकया. िचरा" का सुप"l से न|‘स लेना-7ेना व सुप"l का चाõ-7ा5ल आि7 के िलए िचरा" क| घर
बुलाना 7|नl क| बहुत न77ीक ले आया. सुप"l पर हरपल 3सके ¯यिकत¯व का न7ा छाया रहता, न 7ाने कयl िचरा" 3से अ¯छा ल"ने
ल"ा था बस, 5सके आ"े 3सने कHी कुछ स|चा ही नहl था.
कहा 7ाता है की ÷7ी 7ेम के पीछे Hा"ती है Vर पु'1 Uन के, सामा¯यत: 7ेखने म Hी आता है िक 7हl एक सामा¯य ल7का
अपने कैिरयर के बारे म स|चता है वही एक ल7की अपने मन म एक स¯चे 7ीवन साथी की आकluा रखके 3सके 57-ि"7 सपनl के
ताने -बाने बुनने ल"ती है.. ह| सकता है 3सका Hी यही सं÷कार रहा ह|, 7| एक ल7की ह|ने के नाते 3सने 7ह" िकया ह|. Uीरे-Uीरे व|
7|नl एक 7ुसरे के पूरक ह|ते चले "ए. अरे हl..... एक पिरवतन Vर.. िचरा" 7| बहुत कम ब|लता था अब 7ब Hी सुप"l से िमलता 7|नl
म 7म के ल7ा5 ह|ती Vर ये 7ेम की चा7नी म प"ा 5"डा 7|नl की 7|÷ती क| Vर Hी "हरे 7ल7ल की Vर Uकेलता 7ाता था.
वसंत के अचानक बा7 पत57 के आने की सु"बु"ाहõ 7|नl महसूस न कर सके Vर एक तीसरे 5ं सान का अवlिछत 7वे7 7|नl
क| 7तीत हुआ अिमत के ÷प म. अिमत 7| की अपने मामा के घर 3नके 7हर म आता था, िचरा" के बचपन का 7|÷त था. वह पता नहl
कैसे सुप"l के घर पहुच "या Vर 7ाय7 वह 3से पसं7 आ "यी Vर 3सने सुप"l से अपनी चाहत का 57हार िकया. एक अनचाहा
आक1" कह या िचरा" क| 7लाने -िचõाने के िलए Vर 3से अपनी चाहत का अहसास कराने के िलए सुप"l ने यह िर°ता ÷वीकार कर
Hी िलया. पर¯तु िचरा" 7| सुप"l क| बहुत अिUक ¯यार करता था, 3स ¯यार के वा÷ते व| सुप"l की Uु7ी म अपनी Uु7ी सम5 के यह
सब ÷वीकार कर "या Vर त| Vर खु7 ही 7|नl क| 7|7ने की क|ि77 म ल" "या.
समय डबl रेस के घ|7े की तरह पलक 5पकते ही िकतना आ"े िनकल "या पता ही नहl चला, अब तक 7|नl कlले7 म पहुच चुके थे.
सुप"l का ल"ाव 3सके साथ आने 7ाने रहने से बõता ही 7ा रहा था Vर 5Uर मान| िचरा" की 7ुिनया Hी 3सी के आसपास िसमõती
7ा रही थी. सुप"l 7ानती थी की वह िचरा" से बे5ं तेहा ¯यार करती है म"र 3सकी कHी 3से बताने की िह¯मत नहl हु5. तीन साल का
साथ Vर कुछ घõनाए ि7¯ह|न सुप"l क| स|चने पे म7बूर कर ि7या की िचरा" Hी 3ससे 3तना ही ¯यार करता है ि7तना 7ू U पानी
Vर पानी 7ू U से. व| बस का स7र, एक7ा¯स 7ेकर िचरा", सुप"l Vर 7|नl के 7|÷त वापस आ राहे थे. सुप"l तथा 3सकी सहेिलयl
बस की िपछली सीõl पे बै5ी हु5 थl Vर िचरा" अपने 7|÷तl के साथ एक सीõ छ|7 कर, तHी 7| ल7के आकर बीच की सीõ पर बै5
"ए Vर ल7िकयl की सीõ पर हाथ रखने ल"े, िचरा" के मना करने पर Hी 7ब बात न बनी त| वह अचानक "ु÷से म आकर 3स ल7के
का ि"रेबान पक7 के Uमकाने ल"ा, ल7ा5 बõ चुकी थी, Vर साथ ही सुप"l की घबराहõ Hी.
सुप"l िचरा" से कुछ Hी कह 7ेती या िचरा" सुप"l से पर 7|नl ने एक 7ुसरे के िलए 5ुकना सीख िलया था. 3न 7|नl के िर°तl
के बीच म कHी क|5 सामाि7क ची7 नहl आ5.
7कित त| ब¯चl म Hे7Hाव नहl करती Uूप-छlव "मl स7l सHी क| वह बराबर ¯यार करती है 5सी तरह 7ब ल7की Vर ल7का
7कित के ही अं" ह त| 3नमे अंतर कयl? पर¯तु ि7र एक सामाि7क ¯यव÷था या 7ाय7 ब7े ह|कर पाब¯7ी ल"ने की ि÷थित से बचने के
िलए िकया "या 7य|7न कह लेिकन हुआ यू की 3न 7|नl के 3पर एक अवlिछत िर°ता थुप "या, िर°ता Hा5-बिहन का. िचरा" यही
सम5ता रहा की सुप"l अिमत क| चाहती है Vर एकतर7ा चाहत क|5 मायने नहl रखती. पता नहl ¯यार म कहl कमी थी की िचरा"
सुप"l की चाहत क| न सम5 पाया, 3सकी एक-एक U7कन क| सम5ने वाला 3सका चेहरा ही न पõ पाया. 7|नl न चाहते हुए Hी 5स
तथाकिथत िर°ते क| •|ने के िलए म7बूर थे. पर पता नहl कयl िचरा" की बात Vर 3सके प7 समय समय पर सुप"l क| स7ं िकत
करते रहते थे. एकबार"ी त| िचरा" ने प7 म िलख कर अपने ¯यार का 57हार Hी कर कर ि7या, लेिकन 7ब सुप"l ने 3स प7 के बारे
म पूंछा त| न 7ाने िकस डर से कह के ताल ि7या की '' म त| म7ाक कर रहा था.'' अब ]सा Hी कया म7ाक "|या की िकसी की 7l पे
बन आये.
अब तक7ीर की िलखावõ ये थी की िचरा" अपनी आ"े की पõा5 के िलए बाहर 7ा चुका था, सुप"l क| एक7म अकेला करके
Vर सुप"l थी िक 3सी कlले7 से अपनी प|÷õ 7े7ुए7न की पõा5 करने म ल" "यी थी. िचरा" िक मl क| िचरा" Vर सुप"l के िर°ते
का एक पहलू त| मालूम था पर 7ू सरे से व| Hी अ¯7ान थl 7ाय7 5सीिलए वह सुप"l क| बहुत ¯यार करती थl. रब 7ी म7l िक एक चlथे
िकर7ार के ÷प म 3नकी ि7¯7"ी म अमता आती है. िचरा" ने अमता के साथ अपने िर°ते क| सुप"l से िछपाए रखा पर¯तु ये िर°ता 7ब
िचरा" िक मl क| पता चला त| 3¯हlने 5से सुप"l क| बताया.3स ि7न सुप"l क| ये Hी पता चला िक 5स िर°ते क| का7ी ल¯बा समय ह|
"या है पर¯तु 3सका ि7ल 5स बात क| मान ही न रहा था कयlिक िचरा" क| 3ससे 7या7ा क|5 सम5 सके"ा वह मान ही नहl पा रही
थी. 3सकी मl के कहे क| वह एक बेõे के िलए 3सकी मl िक िचंता के ÷प म ले रही थी. पर साथ ही 3सके ि7ल म Hी एक डर 5स
बात का क|ना पक7 के बै5 "या था िक अ"र ये बात सच हु5 त| कया ह|"ा. Uीरे-Uीरे 3से 5स िर°ते के बारे म कै Vर बात Hी पता
चलl Vर सबसे 7या7ा 7ु:ख 3से 5स बात का हुआ िक िचरा" ने 3से खु7 कुछ कयl नहl बताया. पर यहl Hी िचरा" का ¯यार 3से
एकबार ि7र स|चने पे म7बूर कर 7ेता है िक 7ाय7 िकसी म7बूरी ने 3से ]सा करने से र|क िलया ह|"ा. लेिकन ि7र Hी एक Vर
तीसरा त| 3न 7|नl के 7रिमयl आ ही चुका था न.
एकबार सुप"l अपनी एक बचपन िक सहेली के घर 7ाती है, 7हl 3से अमता िक सहेली िमल7ाती है, सुप"l अपनी सहेली से
िचरा" िक चचl कर रही ह|ती है. पर वही ल7िकयl िक पुरानी आ" ल"ाने िक आ7त, अमता िक सहेली 3ससे चु"ली करती है िक सुप"l
िचरा" Vर अमता के िर°ते के बारे म बात कर रही थी, नती7ा ये िक अमता िचरा" से ल7 7ाती है. िचरा" सुप"l क| 7|न करता है पर
7|नl िक बात नहl ह| पाती है. अब िचरा" अपने साथ िक एक ल7की से 7|न कराता है िक वह िचरा" से बात कर ले, सुप"l घरवालl से
बचती हु5 एक ब7ा िर÷क लेके िचरा" क| 7|न करती है, 3सका िव‡ास ड"म"ा 7ाता है Vर वह स|चने ल"ती है िक कया यह वही
िचरा" है ि7से 3सकी एक-एक बात िक ि7ñ हुआ करती थी, 3से ल"ा िक 3सने िचरा" क| ख| ि7या है. 3सने स|च िलया था िक वह
िचरा" से 3¯õा सीUा ब|ल के 3सके मन म अपने आप के िलए न7रत Hर ले"ी तािक वह आ"े से 3ससे बात ही न करे. मेरे बात न
करने से अ"र िकसी क| 3सका ¯यार िमले, 3सका Hला ह| त| मु5े कया? यही सम5 लूं"ी िक क|5 था ही नहl. हालlिक ये 3सके िलए
बहुत ही मुि°कल काम था पर करना िनहायत ही 7÷री कयlिक एक "लत7हमी ि7सक| िचरा" ने ही आUार ि7या था, 3सने अमता से
कहा था िक 3सके िलए ि7ं 7"ी म सुप"l सबसे 3पर है Vर 3सकी 7"ह क|5 नहl ले सकता. एक स¯चा 5ं सान 7ाय7 अपने ¯यार से
Hी अपने ¯यार क| न छुपा पाया. 7ू सरी 7र अमता सुप"l Vर िचरा" के पिव7 7ेम क| सम5ने म नाकाम रहती है.
सुप"l िचरा" से 3सके Vर अमता के िर°ते के बारे म क5 बार पूछती है पर िचरा" हर बार ताल 7ाता है. Uीरे-Uीरे सुप"l
िचरा" िक खाितर अमता से एक िर°ता बना लेती है, एक िर°ता 7| 7ाय7 7|÷ती का था, बिहन का या 7ाय7 एक सlतन का लेिकन
3सके आसपास के ल|" त| कया व| खु7 Hी 5स िर°ते क| नहl सम5 पाती. 'िचरा" 3सके िलए िस7 एक बचपन का 7|÷त है' ये 3सने
अमता क| पू" िव‡ास ि7लाते हुए कह त| ि7या लेिकन 7ानती थी िक ये सरासर 5ू5 है ि7र Hी कया एक िर°ते क| बचाने के िलए
3सका 5ू5 u¯य नहl था Hला?
आ7 के यु" म ल|" 7ू सरl की बुरा5यl पहले 7ेखते ह Vर अ¯छा5 बा7 म, लेिकन िचरा" 5ं सान की अ¯छा5 ही 7ेखता है बुरा5
7ेखता ही नहl Vर सबके कहने के बा7 Hी अमता की क5 "लितयl क| "लत मानने क| रा7ी नहl ह|ता है. ये व| व€त था 7ब िचरा"
Vर सुप"l 7|नl का अि÷त¯व अमता Vर अिमत म 3ल5 के रह "या था. 7|नl ही एक 7ू सरे पे िव‡ास करते व 7ीखते थे लेिकन 3नका
िव‡ास खु7 पर िव‡ास नहl कर पा रहा था. 3से ये सम5 नहl आता था की 5सी ¯यार से कया सच म 3सका िनकõ, का आ¯मा का
स¯ब¯U रहा ह|"ा.
ि7र एक Vर घõना, सुप"l अपनी प|÷õ 7े7ुए7न की पõा5 पूरी कर के अपने ही 7हर म एक 5ं õर कlले7 म अ¯यािपका ह|
"यी Vर वहl 3से एक साथी अ¯यापक की व7ह से कlले7 म कुछ परे7ानी ह|ती थी, 7ब ये बात िचरा" क| पता चली त| िचरा" ने
3स ब7तमी7 की 3सके घर 7ाकर खबर ले ली. 5¬े7ाक या 5‡र की 5¯छा की वह अ¯यापक 7Uाना¯यािपका, 7| की साथ म 7बं Uक
Hी थी, का खासमखास था बस 5सिलए बात का7ी बõ "यी. बात सुप"l के म¯मी पापा तक पहु ं ची Vर 5स सबका 7|1ी बना िचरा" Vर
स7ा िमली सुप"l क| िचरा" से िमलना-7ुलना, बातचीत सब बं 7 ह|ने के ÷प म. लेिकन िचरा" की यह 7ितिñया 3से एक नया सं केत 7े
"यी, 3से महसूस हुआ की िचरा" Vर वह एक ही अि÷त¯व ह Vर वह अब Hी 3सक| 3तना ही ¯यार करता है ि7तना की कHी ¯यार के
चरम|¯क1 के ि7नl म करता था. लेिकन असहाय सुप"l कुछ न कर सकी. 3से 5स बात का बहुत 7ु:ख हुआ की वह िचरा" की
Hावना7ं क| न सम5 सकी, 5ससे 3से िकतना 7ु:ख हुआ ह|"ा. वह 3से हõ नहl करना चाहती थी. 3सने सुप"l के कार" ही ÷वयं क|
ब7ला था, एक बर"ी सुप"l क| ल"ा की वह ही िचरा" के कािबल नहl थी. िचरा" सम5 रहा था की सुप"l 3ससे नारा7 है, 3सने
सुप"l से कहा की यह तु¯हारी पुरानी आ7त है िक नारा7 Hी रह|"ी Vर न ह|ने का 7म Hी Hर|"ी. पर म तु¯हारी नारा7"ी से Hी खु7 हू
7ाय7 5ससे तु¯हे मेरी या7 न आये. पता नहl कयl िचरा" 5तना Hी न सम5 पाया िक वह त| िचरा" से नारा7 ह|कर 7ीने की क¯पना Hी
नहl कर सकती. व| 7ानती थी िक वे 7|नl एक 7ू सरे के सहारे ब7ा से ब7ा 7ुखl का सा"र पार कर ल"े, िबना िकसी बाUा के.
ि7र एक खेल, कहानी म ि7र एक म|7, िचरा" 77े7 िक रा7Uानी के एक 7िति7त अनुसंUान सं÷थान म 7ि7u" ले रहा था िक
3¯ही ि7नl सुप"l क| Hी अपने कlले7, ि7समे वह पõाती थी, िक तर7 से 3सी 7हर 7ाने का मlका िमला. िचरा" क| 3सने 7|न
करके बुलाया. Vर 7ाय7 व| 7ाम ि7सम िचरा" Vर सुप"l अपनी या7l के साथ त¯हा थे, अपने आप म 3नके 7ीवन िक एक या7"ार
7ाम बन "यी. अब 7|नl ही ि7ल िक बात क| बेबाक लह7े से लबl पे ले आए थे, 7|नl ही 5कबाल कर चुके थे िक 3नके ि7लl म एक
7ू सरे के िलए बेपनाह म|ह¯बत थी, 7| िक कहने क| त| मह7 चं7 "ु7रे सालl की 3प7 थी लेिकन ल"ता की सि7यl की ÷मानी Vर
÷हानी िमलन की त7प थी. लेिकन हाय ि7र वही िह‰ की 7ा÷तl िक िकतनी सी थी ही 3स 7ाम िक 37 7| िक ि7ं 7"ी Hर की एक
या7 बनने का माäा अपने म िछपा के आ5 थी, पानी पे आए एक बुलबुले के ि7तनी. पानी म िखले बुलबुले त| अपनी अहिमयत ख| 7ेते ह
लेिकन िर°तl से 3¯प7 अनुHूितयl आिखरी छ|र तक पीछा करती ह 7ैसे की क|5 पतं " आका7 म 37ान Hरने के बा7 काõने के बा7
Hी 7ू र तक हवा म मचलती है.
सुप"l की 7ा7ी की बात अिमत के साथ चली 7| की बा7 म िकसी कार" से U¯म Hी ह| "यी. िचरा" क| एक 7lब िमल "यी थी
7| िक सुप"l के 7¯मि7न के ि7न िमली थी. िचरा" त| हमे7ा से ही सुप"l क| अपने िलए लकी मानता था, न 7ाने कैसे ये बात अमता
क| पता चल "यी ि7र कया था "लत7हिमयl की िचं"ारी क| हवा िमल "यी. िकसी ि7uा सं÷थान से स¯बं िUत 7वे7 परीuा का ि7न 7ब
7|नl क| एक बार ि7र साथ ि7न "ु7ारने का मlका िमला Vर ता37 सहे7 के रखने के िलए एक Vर या7 का बहाना 7ािमल ह| "या
7|नl की िबखरती ि7¯7"ी म.
Vर ि7र एक ि7न सबकुछ, सबकुछ िकतना अ7¯याि7त हुआ था िचरा" ने एक प7 िलख कर सुप"l क| ि7या था ि7समे 3सने
अपने Vर अमता के िर°ते क| ÷वीकार िकया था म"र प7 की एक बात हमे7ा के िलए सुप"l के िलए रह÷य बन के रह "यी िक ि7ल
Vर ि7मा" 7|नl समान मह¯व िलए ह|ते ह, िकसी एक के िबना 5ं सान नहl रह सकता. अब वह अपने Vर िचरा" के िर°ते क| लेकर
स|चती त| 3ससे िकसी िन¯क1 पे पहुचते न बनता. बस एक स|च 3Hरती Vर िबना िकसी 7ितवा7 के, िबना िकसी पिर"ाम के िवचारl के
7ू¯य म ख| 7ाती. 3से त| ये या7 ही नहl था की ये 7े1 बचा 7ेम 5स 7¯म का है या िपछले 7¯म का या ि7र आने वाले 7¯म की अि7म
िक°त. अब 3स पर हर व€त एक अ7ीब सी खाम|7ी छा5 रहती, हर पल िकसी 5¯ते7ार से न7र (ार क|, िकसी की राह क| तकती
रहतl, क|5 ]सा......... 7| पता नहl अब आए"ा Hी या नहl.
3सके ^वाबl के महल का बचा खुचा खंडहर 3स ि7न •ह "या 7ब 3सके पापा ने एक ि7न कहा िक, 'तैयार रहना कल तु¯हे
ल7के वाले 7ेखने आ रहे ह' . 3सका ि7ल अपनी बेबसी पे र| 35ा Vर वह व€त Hी आ "या 7ब 3से तैयार करके अपिरिचतl के बीच
बै5ाया "या Vर 3सकी 7ा7ी पüी ह| "यी. सुप"l िचरा" से Hावना¯मक संबल चाहती थी पर¯तु एक ि7न Hावुकता म िचरा" 3ससे कह
7ेता है िक 'या त| तुम पूरी तरह से मेरी बनकर रह| या ि7र 3सकी ि7ससे तु¯हारी 7ा7ी तय कर 7ी "यी है.' यह बात सुप"l क|
हकीकत सम5 आती है लेिकन एक बार ि7र 7|नl के 5ुकने से िर°ता एकबार"ी õू õने से ि7र बच 7ाता है. िचरा" Hी 3सकी Hावना7ं
क| सम5 रहा है, 3Uर सुप"l क| ल" रहा है िक वह अपना हर िर°ता ख| चुकी है. आ7 वह ि7ं 7"ी से हर सम5lते के िलए तैयार थी,
वह िचरा" के 7¯7l पर चलना चाहती थी पर कया करती 7| 3सका ि7ल ही साथ नहl 7े रहा था. 7बिक 3से Hी ल"ने ल"ा था िक
िचरा" के साथ चलना त| कबका पीछे छ|7 आ5 थी, हालlिक ि7ं 7"ी म िकतनी ही ची7 पीछे छू õ 7ाती ह ि7¯ह हम चाह कर Hी र|क
नहl सकते ि7र Hी कुछ घõनाए या हा7से लाख चाहने पर Hी ÷मित के 5रlखl म से या7l की पुरवा5 क| अ¯7र लाते ही रहते ह Vर
3नकी खु7बू पहले से Hी "हरी ह|ती 7ाती है. 3से ल"ा िक वह ÷वयं क| िकतना Hी बं Uनमुकत मान ले िक¯तु 3स ÷प7 के 7Hाव से
कHी िवमुकत नहl ह| सकती, वह 3स 7^स के अि÷त¯व क| चाहे ि7तना ही खािर7 कर ले म"र 3सके िबना ि7ं 7ा रहना कि5न है वह
एक ]से कै7ी िक तरह ल"ती थी ि7से ि7तनी िरहा5 िक ि7ñ थी 3ससे कहl 7या7ा €ै7 रहने की.
3सका ÷वाHाव बेह7 िचõिचõा ह|ता 7ा रहा था, अकसर वह परे7l कुछ •ू ं•ती सी न7र आती. वह खु7 रहने की क|ि77 करती
म"र राह नहl पाती थी पर कया करे म7बूर थी की वह र|õी हु5 हं सती न7र नहl आ सकती थी.3Uर िचरा" 7| 5तने सब के बाव7ू7
3सी "म क| पीकर खु7 Vर सम57ार बनने का ि7खावा करता रहा.सुप"l िचरा" क| िर°तl के 7ाल म ि7र से 7साना नहl चाहती थी.
5स ÷वाथ पू" 7ुिनया म िस7 िचरा" ही ]सा त| था ि7सने 3से सम5ने की क|ि77 की Vर 5स क|ि77 म का7ी ह7 तक स7ल Hी
रहा लेिकन मेरी िक÷मत ही ख|õी ह| त| व| कया करता. वह 7ानती थी िक 3स 7ैसे 5ं सान के िलए घर के नाम पर एक बं 7 िख7िकयl
का कमरा ही बहुत है तािक वह िकसी से कुछ न कह सके, वह नहl चाहती थी िक 3सकी व7ह से िकसी क| क|5 परे7ानी ह|. वह
चाहती थी त| िस7 5तना िक H"वान िचरा" की खुि7यl के साथ ¯याय करे, वह 7हl Hी रहे खु7 रहे. वह िचरा" से कहना चाहती थी
की तुम मु5े Hूलना मत लेिकन एक या7 से 7या7ा या7 Hी मत रखना Vर मु5े या7 करके 7ुखी मत ह|ना Vर कहना चा’ती थी िक मु5े
िव‡ास है िक म ि7ं 7"ी से कHी नहl हा÷ं "ी कयlिक मेरे साथ तुम 7ैसे......... िक 7ुआएं ह. वह कहना चाहती थी िक िचरा" मेरी छ|õी
सी ि7ं 7"ी म िस7 तुम ही ह| ि7स पर मने आख मू7 कर Hर|सा िकया, पहले म स|चती थी िक 7ैसे 7|÷तl क| िकताबl Vर ि7¯मl म
ि7खाया 7ाता है वैसे 5ं सान क| सच म नहl िमल सकते, म"र नहl तुमने मु5े "लत सािबत कर ि7या िचरा", तुमसे मु5े 3स "हरे से Hी
"हरा ¯यार िमला है, एक िन÷वाथ, िन°छल, 7ैवीय ¯यार ि7समे मना से मन के िमलन के अलावा Vर िकसी न‡र चाहत क| 7"ह नहl
थी. वह कहना चाहती थी िस7 5तना िक 'िचरा" अ"ले 7¯म म िस7 मेरे ही रहना Vर मु5से 7ु7ी सारी न सही पर कुछ बातl, या7l
क| ता7ा रखना कयlिक अ"र 3¯ह ता7ा न रखा 7ाये त| वे पुरानी ह|कर, बू•ी ह|कर मर 7ाती ह. आ7 िचरा" त| खाम|7 है म"र
सुप"l का ि7ल बार-बार कह रहा है िक-
'मेरी व7ा तेरे साथ है, म नहl त| कया.
ि7ं 7ा रहे"ा ¯यार मेरा, म नहl त| कया..'
'िििि ििििि'(ye kahani mere kisi aziz ki hai)
36- छ|õी ब3(7ा7ी) व| महान आ¯मा थl, ि7¯हlने मु5े 7| ÷नेह, 7| 7ुलार ि7या व| आ7 तक म •ू •ता हू. असल म छ|õी ब3 मेरे बाबा
िक चाची थl 7| ता37 कहने क| त| क|ख से एक सं तान क| 7¯म न 7े पाने के कार" िन:संतान रहl लेिकन आस प7|स म Vर घर म
क|5 ]सी संतान न थी, ि7सके िलए व| मl न हl...
7ाय7 ये किवता ह| ल|"l के िलए म"र-
मेरे िलए ये एक अतुलनीय 7ेम के आ77 का 7ित7ापन है,
7| 7ेते ह ल|" आरा¯य क| 3ससे Hी 3ं चा आसन है.
हर आघात म •ाल थl तुम,
थl 7ेखने म छ|õी म"र
77य से Uरती सी िव7ाल थl तुम.
तुम थl 5क मूरत ¯या" की
सेवा Vर िन÷वाथ की,
कHी सुना न नाम 5‡र का
मुख से तु¯हारे,
पर ÷वमेव 5‡र का अथ थl तुम.
7ू U म पी 7ाता था
Vर
ले7म से मार खाती थl तुम छ|õी ब3....
मार मु5े िमलती पापा से Vर
अपना माथा लहूलुहान कर लेतl थl तुम छ|õी ब3....
िचि7यl के न¯हे ि77ु7ं क|
िमलता 7| Hाव सुरuा का,
नी7 म, मl के परl के संरu" म,
वैसा ही अहसास िमला मु5क|
तु¯हारे आचल म छ|õी ब3....
तु¯हारी एक "थूली,
एक िबछlिनयl वाले िब÷तर म छ|õी ब3....
तु¯हारी U|ती की "l5 म बं Uा
व| 7स पैसे का िसüा,
मेरे िलए आ7 की
ह7ारl, लाखl की कमा5 से ब7ा था.
7ब अकल नहl थी मु5म
त| तुमने ही चव7ी 7ेकर कहा था-
'मुकु¯7ी पं सारी से ले आ7'
Vर म चला Hी "या था,
अकल खरी7ने .
तु¯हारी चव7ी से मु5े
अकल त| न िमली पर तुम िसखा "यl
म|ल िर°तl का छ|õी ब3.......
अHी Hी ह 7ित¯विनत
तु¯हारे ल|क"ीत,
7|र से िघर चुके मेरे 5न कानl म-
'मैना ब|ली िचर†यन के न|ते हम 7ाए ....
मैना ब|ल "यी.....'
आ7 7ब लता 7ी Hी
नहl चाहती बनना िबिõया 7|बारा,
तुमने तब Hी कहा था
'अ"ले 7नम िबिõया ही बनू म...
आ7 अनपõ त| कया...
अ"ले 7नम बी.ए., ]म. ए. प•ू ं म....'
अब कया ि7ला पाये"ी अहसास,
सुरuा का तु¯हारे 7ैसा,
क|5 7ेिमका?
तु¯हारे 7ाने के बा7
ख|7ता रहा 5ीक तु¯हारे 7ैसा..
¯यार, सं रu" Vर ममता...
मेरी खु7 की मl म,
7ाय7 ख|7ूं"ा सेवा, समप", ¯या" Hी
अपनी ह|ने वाली Hायl म....
पर सबसे तुलना
िस7 तु¯हारी ह|"ी छ|õी ब3...
Vर पता है िकतना ही सुख पा 7ा3,
पर हर7म 7ीत तु¯हारी ह|"ी छ|õी ब3...
म7र õेरेसा ना िमलl मु5े,
पर तुमम 7ेखा 3¯ह 7¯यu...
तुम थl, हl तु¯ही ह|
मेरी 7ेõ म7र õेरेसा छ|õी ब3...
म का¯हा त| न बन पाया
पर तुम थl बõके 77|7ा से.....
अरे 77|7ा ने त| क¯" क|
अपने पु7 के •म म पाला
पर....
ये 7ान के Hी, म नहl अं 7 तु¯हारा
तुमने अपने अं 7 म मु5क| •ाला....
आ7 स|चता हू
की कया है 7क तुमम Vर कबीर म?
कबीर ने ¯या"ी थी 7ेह म"हर म,
ये •म त|7ने क| िक
वहl मरने पे िमलता था नकUाम...
Vर तुमने
ता37 न माना 5‡र क| छ|õी ब3...
ि7र Hी ल"l रहl सjकामl म..
Vर म¯यु ने तु¯हारा वर" िकया था
7ेव|¯थानी ¹यास क|,
मर 7ाते ह िकतने साUू
लेकर 5सी अिHला1 क|.....
लेिकन म¯यु Hी तु¯हे मार न सकी छ|õी ब3....
तुम अमर ह| मेरी.... हमारी ÷मित म...
आ7 7ब नहl ख|7 पाता क|5
5स ÷वाथl 7ुिनया म अपना सा...
त| सम5 आता है िक......
तु¯हारे 7ाने से कया ख|या छ|õी ब3...
या7 है अHी Hी मु5े
व| अं7े7ी का ह|म वक 7| म पूरा न कर पाया था
7ेह ¯या" कर तुमने अपनी
मु5े मार से बचाया था छ|õी ब3...
मेरे मन म पनपा õीचर से मार का डर,
तु¯हारी म¯यु ने U¯म कर ि7या था छ|õी ब3...
कयlिक म ÷कू ल 7ाने से बच "या था...
Vर म 5तने से 7ाय7े के िलए
तु¯हारे मरने पे खु7 था छ|õी ब3....
हाय म अHा"ा......
न सम5ा तु¯हारा वा¯स¯य, तु¯हारा ÷नेह Vर 7ुलार...
एक तुम थl ि7सने मर के Hी
मु5े मार खाने से बचाया था
Vर एक म था
7| तु¯हारी मlत पे ह1lया था.....
7ब तक सम5ा म
िक कया थl छ|õी ब3....
तुम 3ससे पहले ही साथ छ|7 "यl,
अब कैसे 3र" ह| पा3ं "ा म,
बस तु¯हे ÷मित म बसा के
"ीत तु¯हारे "ा3ं "ा म...
7ेव बन के तुम मु5े
7े रहl अ7ी1 लख-लख,
पर कह रहा मु5से
ये मेरा 7मीर प"-प" ....
म तु¯हारा अपराUी हू छ|õी ब3,
म तु¯हारा अपराUी हू छ|õी ब3........
7ीपक 'म7ाल'
साहब ि7राक "|रखपुरी ने एक 7ेर म कहा है की-
'हम त| 5ं सान क| 7ुिनया का खु7ा कहते ह'
37- 3¯ही की त7 पे कुछ पं िकतयl ह -
'ि7¯ह Hर|सा नहl खु7 पे व| ब7लते ि7र खु7ा,
हम त| ि7राक तेरे खु7ा क| ि7ल 7े बै5े.
ब7े खु7ा हl मुबारक ब7े ल|"l क|,
हम त| छ|õे ह, छ|õे खु7ा के सं" 7ा बै5े.
कब कहा खु7ा ने िक बlõ 7| मु5क|,
व| त| हम ह 7| खु7 क| ही बlõ के बै5े.'
7ीपक 'म7ाल'
38- 5¯मीनान से 7ेख| मु5े ि7र खरी7 ल| सािहब,
बस मlस का पुतला हू 5क तुम खरी7 ल| सािहब.
नख से लेके के7 तक कर ल| मुआ5ना मेरा,
पर ि7ल म मेरे न 5lिकए बस खरी7 ल| सािहब.
ना बेõी, बिहन ना आपकी ना म बहू क|5,
7ल 7ाये"ा चू„ा मेरा 7| तुम खरी7 ल| सािहब
मं7ूर है 7| कुछ समय 7या7ा ह| तुमक| चािहए,
7| 7े सक| 7े7| मु5े पर खरी7 ल| सािहब,
Hूखी बिहन है घर म V मl मेरी बू•ी सी है,
िमल 7ाए"ी 7ुआएं क5 "र तुम खरी7 ल| सािहब..
7ीपक 'म7ाल'

39- छ|7 के त¯हा चले "ए तुम
क|5 कमी त| रहती ह|"ी
म7बूरी या अिव‡ास की
क|5 न7ी त| बहती ह|"ी.
सात 7नम के िर°ते õू õे
5क िबना िकसी सी बात पे
मेरी बातl के 7ा7ू म
क|5 कमी त| रहती ह|"ी.
म अनपõ 5हरी पõ ना पा5
तुमरे 77य की पाती क|
Vर मने 7| िलखा था 3समे
क|5 कमी त| रहती ह|"ी
व| रात है अब Hी ता7ा मन म
7ब 7ेरे िलए थे हमने सात
पर मेरे मन के 7ेरl म ही
क|5 कमी त| रहती ह|"ी.
हं स के ही बातl बातl म
मु5क| तुम बतलाते त|
7| क|5 Vर कमी थी मु5मे
तुम मु5े िस7 7तलाते त|
7ाय7 7तलाया Hी ह| तुमने
पर म ही कुछ ना सम5 सकी
सम5ी ना म क|5 57ारा
क|5 कमी त| रहती ह|"ी.
7ीपक 'म7ाल'
40- पर¯परा की चाल ने .....
एक, 7|, तीन, चार,
पlच, छ:.....
पूरे तेरह िव7
थे िवरा7मान 3स पं िकत म...
रस÷वा7न के िलए,
ि7वं "त आ¯मा की 7lित के
नाम पर आय|ि7त
3स ि7य|77ी H|7 म.
तHी ब|ले 5क िव7 7ेव
ह| 7ाता H|7न ये ÷वाि77,
7| कम ह|ता नमक कुछ रायते म.....
अरे कैसे ये पा1ा" से
स^त ह लƒडू बने ये?
7ू õे थे 37"ार ये
एक Vर 4ा“" 7ेव के....
थी सुन रही आि7वचन ये
बै5ी हु5 7हली7 पे,
5क मूित सी ‡ेता¯बरा,
ख|या था ि7सने सर से साया
अपने 77य के नाथ का
व| थी बनी िवUवा नयी
Vर अब नाम पे 5स H|7 के
थी ख| चुकी व| घlसला,
ि7समे था 7ीवन पला...
िचपेõती 7ाती 77य से
अपने 77य के अं 7 क|....
7ु:ख था 3से कैसे बõे,
लेकर व| अपने वं 7 क|...
कlन था 7|1ी म"र
3सके 5स िव¯वं 7 का
पित त| "या था छ|7 के
छीना था 3सक| काल ने
सर से छत छीनी म"र
पर¯परा की चाल ने ,
सर से छत छीनी म"र
पर¯परा की चाल ने .....
7ीपक 'म7ाल'
41- 5स बार ि7वाली सूनी सी है,
ि7ल की 37ासी 7ू नी सी है.
बेõा है पर7ेस म बै5ा,
मl-बाप की आख म Uूली सी है.
िकतने 7ीप 7ले आ"न म,
पर अUेरा 7ैला था मन म.
5कबार अ"र तू आ 7ाता,
हलचल सी ह| 7ाती तन म.
7ेख|-7ेख| त| ये बाती,
बु5ी-बु5ी सी ल"ती है,
िकतनी चीनी प7ी खीर म,
पर 7ीकी सी ल"ती है.
7| नयन हमारे हुए समं7र,
कया या7 तु5े ना आती ह|"ी.
37के बा7ल की क|5 õुकडी,
कया तेरी आख ना छाती ह|"ी.
तारीख अब या7 कहl ह,
बस ]से ि"नते ह ि7न.
िकतने ि7न के "ए हुए तुम,
आने म िकतने ह ि7न.
ि7न ि"नते ह अब त| केवल,
3¯õे अपने 7ीवन के.
7ीते 7ी 5कबार तू आ7ा,
चाहे ना आना बा7 मरन के.
7ाने कयl ये ^वाब कयl आया,
के तू लlõ के आया है.
7ाय7 3मर का असर Hी हमपे,
पा"लपन सा छाया है.
सुख से रह| 7हl Hी 7ा7,
Uन पा7 Vर नाम कमा7.
अ¯छा है मर 7ाए हम,
5क नया 7नम ि7र पाय हम,
5तनी है िबनती H"वन से,
हम आय तेरे ब¯चे बन के
हम आय तेरे ब¯चे बन के..
7ीपक 'म7ाल'
42- एक पlUा हू मु5े बर"7 बना 7|,
मेरे मlला मु5पे Hी तुम मु÷कुरा 7|.
डरता हू रहता म अकसर मुि°कलl से,
िह¯मतl क| तुम मेरा म7हब बना 7|.
7े सकू ं छाया म हर थकते पिथक क|,
7ाख क| मेरी तुम 5तना कर घना 7|.
खlच लूं 37ते हुए बा7ल की õुक7ी,
मेरे प¬l क| 7Hू 5तनी हवा 7|.
म रहू ि7ं 7ा यहl 7बतक Uरा पे,
पं िछयl के घlसले मु5 पर स7ा 7|.
सूख 7ब 7ा3 त| लेके 7ाख 5क-5क,
घर िकसी मु7िलस से 5ं सl का बना 7|.
सूंघ लूं म बू बुरा5 की कहl Hी,
5¯म की 'म7ाल' सी मु5म 7ला 7|.
7ीपक 'म7ाल'
43- मारा "या
ि7र 5क क|5 हवालात म,
चीख थी 3सकी सुनी
हमने Hी रात म,
कहती पुिलस है
'व| ब7ा ब7मा7 था
पर
कुबूल करता नहl अपराU था'.
पर व| त| बस
Hूख का मारा था 5क,
3सका था न घर क|5
ना मl क|5
ना बाप था.
बाल था,
स| म77ू र Hी
ना क|5 रखता 3से,
पर ताप क| पेõ के
5स बात से कया वा÷ता,
था •ू •ने व| ल" "या
क|5 नया 5क रा÷ता.
हीरे सी चमकी थी आख
7ेख के व| त°तरी,
छ|7ी 7| थी िकसी ने
थी र|õी 5क 3समे प7ी.
अंUा व| मारा Hूख का
ना सू5 पाया,
न 7ाने कैसे हाथ क|
र|õी पे पाया,
तHी
यम7ू त सा था आ ख7ा,
मािलक ह|õल का व| साया.
बस व| घ7ी
3सके िलए मनहूस बन "5,
र|õी व|
3सके िलए थी मlत बन "5.
थी •ू ं•ती ि7रती पुिलस
5क सर"ना क|,
ि7सने िहला रखा था
समूचे पर"ना क|,
करने सािबत 7ुõ "ए
ि"र|ह का िह÷सा 3से,
अखबार म Hी 7े ि7या
बना के एक िक÷सा 3से.
5क खबर छ|õी सी
7काि7त त| थी हु5,
आया ना 3सक| 7ेखने
पर क|5 5ं सान था,
रl7नी थी अब म"र,
करना "ुनह"ार सािबत 3से
खाकी व7l के िलए आसान था.
] 7Hाकर!!
रि°मयl Hी तेरी कया करतl?
7ब ि7लl म ही िघरा
ितिमर घनघ|र था,
7|र ये 3प7ा िक व| 5क च|र था....
7|र ये 3प7ा िक व| 5क च|र था....
7ीपक 'म7ाल'
7ीप 7लते रहे, ि5लिमलाते रहे,
ल|" िमलते रहे मु÷कुराते रहे.
चl7 आया नहl आसमl म त| कया,
तारे 7मl के िõमिõमाते रहे.
कुछ पõाखl क| सुन िखलिखलाते रहे,
कुछ पिहन व÷7 नव 7"म"ाते रहे,
ि7र Hी ब¯चे क5 पेõ खाली िलए,
नl7 की िसलवõl म कुलबुलाते रहे.
7| Hी म7ह|7 थे व| त| स¯हले रहे,
ह|7 वाले म"र ड"म"ाते रहे.
5स तरही ने हाल मेरा ]सा िकया,
हाथ म ले कलम कसमसाते रहे.
कुछ पलl क| ^वाबl से कु]ी हु5,
Hूली या7l क| बस "ुन"ुनाते रहे.
आ7 िर°ते 'म7ाल' 3नसे õू õे सHी,
लहू ि7नके िलए तुम 7लाते रहे.
7ीपक 'म7ाल'
िििि ििि िि िििि िि ििि, ििि ििििि िििि िििि िििि,
िि िि ििििि िििि ििििि िि, िि ििििि िििि िििि िििि.
िििि ि िि िििि ििि ििि िि, िि ििििि िििििि ििि िििि,
िििि ििििि िि िििि िििि िि, िि ििििि िििि िििि िििि.
िििि ििि िििि िि िि ििि िििि, िििि िििि िििि ििि िििि,
ििििि िििि िि ििि ििििि िि, िि ििििि िििि िििि िििि.
ििि िि िििि ििि ििििि िि ििि िि, िि िििि िििि ििि िि,
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ििििि ििि िि िििि ििि, िििि िििि िििि-ि-ििि,
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ि7य िम7,
किवता एक ]सा बा7ल है, 7| कब ि7हन के आसमान पर आ 7ाये, छा 7ाये Vर कब बरस 7ाये 5सका पूवlनुमान क|5 मlसम िव7े1H
नहl कर सकता. कयlिक ना त| आम मानसून की तरह 5सका क|5 व€त ह|ता है Vर ना ही यह किव िकसान की 7ुआ7ं के असर से
बनता, बरसता है. बस 7ब Hी 77बात के समं7र पे िकसी हालात का सूर7 अपने सुख या 7ु:ख के अहसास का ताप 7ैलाता है त| एक
किवता 'पी बा7ल 7¯म लेता है. अब िनHर करता है की कब िकस तरह का सूर7 3"ा Vर 3सने िकस तरह के 77बात क| 3कसा के
कlन से बा7ल की किवता बना डाली. ]सी ही कुछ किवताय 7ीवन के आते-7ाते u"l म 77य से अवतिरत हु5 ह 7| आपके सामने
7÷तुत कर रहा हू.
7हl तक म सम5ता हू, अिH¯यिकत की 7ि7 से 7ेख त| किवता एक न7ी की तरह Hी है. 7ैसे एक न7ी का नैसि"क ÷प ि7तना सु¯7र,
मनम|हक व आनं 77ायक ह|ता है Vर 7ैसे छ|õे-ब7े प¯थरl से õकरा कर के एक अिनि•त वे" से बहती न7ी, ि7सकी कल-कल की
करतल ¯विन 7ाि"मा7 क| अपनी 7र बरबस ही खlच लेती है, 7ीवन 7ेती है, 5ीक वैसे ही न5 किवता या छं 7 मुकत किवता ह|ती है. नयी
किवता म आप अपने ि7ल की बात पू" िनि•ंत ह|कर, ÷व¯छं 7 ह|कर रख सकते ह. '7¯7 सं य|7न 5ीक है या नहl, मा7ाए बराबर ह या
नहl, Uारा7वाह है या नहl' 7ब ये सारी बं ि77 हõ 7ाती ह त| िबना िकसी 7ेर ब7ल के हम अपनी Hावना7ं क| 7स की तस
अिH¯यकत कर सकते ह, हl बस 5तना ¯यान रखना ह|ता है की अपनी कही बात िस7 ÷वयं के ही नहl बि¯क सHी के सम5 म आये.
5सम 7¯7 ि7¯प पे थ|7ा ¯यान 7े सकते ह. सािहि¯यक Hा1ा म म ना त| 7या7ा व"न करना चाहता हू Vर ना ही म बहुत िव7े1H हू, हl
म"र 5तना कहू"ा की न5 किवता म ÷प सl7य के ब7ाय Hाव सl7य पर अिUक ¯यान 7ेना ह|ता है.
वही 7ू सरी 7र मुकतक, पू" किवता, "ीत, 7|हा, स|र5ा, चlपा5 5न सब म Hावना7ं के मम क| 7ीिवत रखते हुए 3से रस, छं 7, अलंकार
से िवHूि1त कर 7ेते ह. वैसे ही 7ैसे की असीिमत वे" वाली 7चंड न7ी क| 7न|पय|"ी बनाने के िलए 3सके तõl पर घाõ बना ि7ए 7ाए ,
7हर बसा ि7ए 7ाए , 3सक| िनयं ि7त करने के िलए बlU बनाये 7ाए . 5ससे न7ी के 7ाकितक सl7य म ब7लाव आना त| ÷वाHािवक है
िक¯तु अ"र 5स सब से ह|ने वाले लाHl क| ¯यान म रख त| ये ब7लाव साथक ही िस¿ ह|ते ह. 7रा ¯यान 7ीि7ये, एक बार ि7र ल"े"ा
की ]सा ही त| एक पिर¯कत का¯य रचना के साथ है, 3सकी खूबसूरती क| बõाने के िलए 3स सिरता का, किवता-कािमनी का "ं"ार कर
ि7या 7ाता है.
ये सं7ह 7| आपके हाथ म है 5सके लेखन व 7का7न का "ेय 5‡र के अलावा सव "ी मेरी छ|õी ब3, मेरे बाबा, नाना, म¯मी-पापा,
"ु÷7ी, पिरवारी7नl व अिH7 िम7l क| 7ाता है. सम÷त पिरवार का 3¯लेख नहl कर सकता कयlिक का7ी ब7ा एवं संयुकत पिरवार है
Vर 5‡र की कपा से अHी तक ना त| घर के ब¯चे बõे ह Vर ना ही ब7े. क5 किवताय” या त| 5नम से िकसी ना िकसी क| ¯यान म
रखकर बुनी "यl ह या ि7र कहl ना कहl से 5नसे 7ु7ी ह. क5 ]सी किवताय” ह 7| की 7ीवन के स7र म घिõत हु5
घõना7ं/7ुघõना7ं की च°म7ी7 ह या 5नमे िकसी तरह िमले ल|"l या िकसी चिर7 िव7े1 की Hावना7ं क| 3केरने की क|ि77 Hर की
"यी है. कुछ रचनाए ]सी ह 7| िक '"र ]सा ह|ता, त| कैसा ह|ता' की त7 पर िनिमत िक "5 ह, ये ह त| का¯पिनक ही लेिकन ये क¯पना
िकसी अहसास क| 5¯सान से 7|7ने के िलए की "यी ह, 7ैसे मन म ही एक क¯पना 3Hरी की यि7 क|5 ]सा ¯यिकत ह| ि7सक| िकसी
िव7े1(ि7य/अि7य) पिरि÷थित से ह|कर "ु7रना प7ा ह| त| 3सके मन पे कया बीती ह|"ी या 3स व€त 3सने कया स|चा ह|"ा? या 3सके
÷थान पर ÷वयं क| रख 3सके मन|Hावl क| का"7 पर 3तारने की चे7ा िक है. वही कुछ किवताय” समाचारप7l म 7काि7त असमं7स
म डाल 7ेने वाली Uबरl की ¯यु¯पि¬ Hी ह..
अंत म 5तना ही कहू"ा की यह एक 7यास िकया है क5 अहसासl पे कलम चलाने का. 3¯मी7 त| है लेिकन 3ससे अिUक है िव‡ास, व|
ये िक ये रचनाए आपके हाथl तक ही नहl बि¯क वहl से ि7ल तक Hी पहु ं च"l, अब यह 5मान7ार 7यास िकतना साथक िस¿ ह|ता है
5सका िन"य आप पर ही छ|7 रहा हू. आपकी 7ितिñया का 5ं त7ार रहे"ा.
7य िहं 7...

आपका ही-
7ीपक 'म7ाल'
9!1 "a-0/'i a!" 2"a:i-0#



Sunday, April 18, 2010
िििििििि िि ििििििििििि ििििि िि िििि िििि िि ििििि िििििििििि , ििििििििि िि
िििि ििििििििि ------>>> िििि 'िििि '
बहुत ि7नl से अपने आप क| र|कने की क|ि77 म ल"ा था िक 7ैसा चल रहा है चलने 7| 7ुिनया के अ¯य िवHा"l की तरह यहl ¯लl"
िवHा" म Hी हर तरह के ल|" ह 3¯ह 5ेलना ही प7ता है Vर यहl Hी 5ेलना प7े"ा. लेिकन अबअपनी ही िलखी एक किवता की
पं िकतयl-
''के ह7 ह7l की U¯म हु†..
7ेख| अब Uैय Hी छलका है.
खूंखार हुए कlरव के 7र..
"lडीव तेरा कयl ह¯का है.''
या7 आने ल"l ह. 7ेखा 7ाए त| 7|नl पul से ही ये अन"ल वातlलाप ह| रहे ह लेिकन 7ब से 5स ¯लl"वुड म अनवर 7माल Vर सलीम
खान 7ैसे ल|" आये ह तब से तनाव 7ैसी ि÷थित बõती ही 7ा रही है. 5नकी बकवास Vर बेहू7ा तकlं से त| यही सािबत ह|ता है. आ7
की तारीख म सलीम खान Vर अनवर 7माल से 7े7 की अखंडता, सl77ाियक स•ावना Vर अमन, चैन क| ि7तना खतरा है 3तना ही
¯ल|"वा"ी या 7ू सरे अ¯य संकलकl क| Hी. कयlिक यि7 िनकõ Hिव¯य म 5नके 7हरीले Vर बेिसर-पैर के िव°ले1" से 7ं "ा-7सा7 की
ि÷थित बनती है त| कानून के हाथl (ारा कlलर 5न ए7ी"ेõर की Hी पक7ी 7ाए"ी.
ना त| 5न Uािमक अनपõl क| कुरआन का क आता है Vर ना वे7 का व लेिकन ि7र Hी ये ÷वघ|ि1त िव(ान बने हुए ह. िस7 अनुवा7 की
Hा1ा सम5ते ह मम की नहl, संवे7ना की नहl. 3पर से 5नके ¬-$ चमचे 7| िक िबलकुल Uम–U Vर मुि÷लम समा7 के नाम पर कलंक
ह बराबर 5नक| पीछे से समथन 7े रहे ह. वैसे 5न 7ैतानl की सं^या 7या7ा नहl है लेिकन अपने िलए 5¯ह|ने क5 िह¯7ू Vर मुि÷लम नामl
से 77l आ5.डी. बना रखी ह. पता नहl ये सब 7" 7ािहर ह|ने के बा7 Hी ये संकलक कयl 5न आ÷तीन के सlपl क| 7"य ि7ए हुए है,
कयl Hी¯म की तरह चुपचाप तमा7ा 7ेख रहे ह.
कHी ये 5÷लाम के स¯7े7 क| अपने िहसाब से ब7ल कर ल|"l के सामने रखते ह त| कHी वे7l Vर पुरा"l क| 5ु5लाने म ल"े रहते ह..
ि7न पु÷तकl ने Hारत क| िव‡"ु' की प7वl ि7ला5 3से ये कल के चूहे 5ू5, अनाचार Vर क7ाचार का पुिलं 7ा सािबत करने म ल"े ह.
अHी कुछ ि7न पहले ही Uम-पिरवतन क| ही लŽय बना रखा है Vर ल|"l के सामने 3न घõना7ं का बार-बार ि7ñ कर रहे ह 7| िकसी
समु7ाय िव7े1 की Hावना7ं क| H7का कर "हयु¿ की ि÷थित पै7ा कर सकती ह. ब7ी ला"लपेõ के साथ 3न ल|"l के तथाकिथत
साuा¯कार 7÷तुत कर रहे ह ि7नके ह|ने ना ह|ने से 7ुिनया क| क|5 7क नहl प7ता.
िकस की 7ुहा5 7े रहे ह ये ल|"? िकसके नाम से डरा रहे ह? अ¯लाह के 5‡र के या H"वान के? अरे बेवकू 7l व| रहीम है, व| करीम है,
व| H"वान है, 7या सा"र है, कपाला ह. तु¯ह कया ल"ता है एक मंि7र या मि÷77 त|7 7ेने से व| अपना कहर बरपाये"ा? व| िस7 ये सब
7ेख कर कहl बै5 कर हं से"ा िक ''ब¯चl!! तुम एक 5मारत त|7 कर सम5ते ह| िक मेरा नाम िमõ 7ाए"ा? अरे तुम स¯पू" प—वी, 5स
सि7 क| Hी िमõा 7|"े तब Hी मेरा नाम ना िमõा पा7"े.'' Vर येही व| खूबी है 7| 3स सव7िकतमान क| 5ं सानी स|च से अल" करती है.
तुमने त| म7ाक बना कर रख ि7या.. कहते ह| 3सका क|5 ÷प नहl, क|5 रं " नहl... Vर िस¿ ये करते ह| िक वह हमारी-तु¯हारी तरह
स|चता है, ब7ले लेता है, खु7 ह|ता है. अ7ीब •म म ह|.
ये अनवर 3लõे-सीUे िव°ले1" त| करता ही है लेिकन साथ म यह Hी मानने क| रा7ी नहl िक 3सका िव°ले1" "लत है Vर मन"õंत
है. आप सबने एक चुõकुला त| सुना ही ह|"ा िक 'एक 7राबी से 7राब छु7ाने के िलए िकसी महामना ने 3सके सामने एक ि"लास म
7राब डाली Vर एक की7ा डाल ि7या, कुछ ही समय म की7ा मर "या त| 3स 7राबी से पूछा िक 5ससे कया सबक िमला? त| 7राबी
ब|लता है िक 7राब पीने से पेõ के की7े मर 7ाते ह.''
ये 5सी तरह की बेअकल स|च वाले ल|" ह.
''75े 7ा˜यम समाचरेत'' का मतलब Hी ये मूख के साथ मूख का सा ¯यवहार करना चािहए बताए"े ना िक 7ु7 के साथ 7ु7ता का.
अिमत 7मl ने बहुत क|ि77 की 5¯ह सम5ाने की, सती7 सकसेना 7ी ने की, एकाU बार मने Hी की लेिकन ये अपनी आ7त से म7बूर
ह. मना िक बहुसं^यक समु7ाय के कुछ ल|" Hी कHी-कHी 5स तरह की अन"ल Vर बेहू7ा बात करते ह लेिकन व| कHी 5तने
आñामक नहl ह|ते ना ही 77l आ5.डी. बना कर िकसी क| Uमकाते या िõ¯प"ी करते ह(7ैसा िक ि7र7lस 7ी ने बताया).
अरे 5तनी सी बात सम5 नहl आती िक यि7 यही सव7िकतमान की म7l थी 7| ये ल|" स|च रहे ह त| सबक| एक ही समु7ाय म पै7ा ना
करते? हम कैसे 3सकी म7l के िखला7 7ा सकते ह व| त| खु7 चाहता है िक िविH7 तरीकl से मु5े या7 कर| पर कर| त|, मु5े या7
रख|"े त| म¯यु का Hय रहे"ा, म¯यु का Hय रहे"ा त| "लत काम नहl कर|"े Vर अनु7ासन म रह|"े ि7ससे िक ये 7ुिनया 7ब तक
अि÷त¯व म रहे"ी सुचा÷ ÷प से चलती रहे"ी.
बताना 7÷री सम5ता हू िक मेरे 7| 7| सबसे ¯यारे Hा5 ह 3नके नाम म|ह¯म7 आ7म Vर अकबर का7री ह Vर 5ससे कम से कम
मु5े त| क|5 7क नहl प7ता. मेरे पापा के सबसे करीबी 7|÷तl म से एक 5ं त7ार चचा के साथ हमारे सालl से पािरवािरक स¯ब¯U ह.
आ7 Hी या7 है िक हमारे पािरवािरक िम7 Vर मेरे बाबा के "ु' ÷व"lय "ी िव7ाल च¯चा िकतने अपनेपन से ि7वाली Vर ह|ली पर
कõी-चावल, 7ाल, पाप7, चीनी Vर 7ही ब7े की कलl7ी घर आकर िकतने हक से आHा 7ेकर मं "ाते Vर खाते थे Vर 57 पर िõि7न
Hरके िसव5यl Hे7ते थे. नाि7म च¯चा की Hसl का 7ू U पी-पीकर हम ब7े हुए लेिकन आ7 तक िकसी ने िकसी की आ÷था पर च|õ नहl
की. र|7े की नमा7 मने मि÷77 म पõी त| स57 ने व7ू बनाने के िलए मेरे हाथl, पैरl पर पानी डाला त| 3सने Hी 7ेवी मूित िवस7न पर
मेरे साथ 7सा7 बlõने म हाथ बं õाया Vर ये सब सलीम की तरह िकसी अपराUब|U क| लेकर नहl िकया बि¯क 5ं सािनयत के Uम क|
सबसे ब7ा मान कर िकया. ये प|÷õ ि7स ¯लl" पर म डाल रहा हू व| Hी मेरे 7|÷त म|ह¯म7 7ािह7 'अ7नबी' Vर मेरा सा5ा ¯लl" हैˆ
वैसे कहने की 7÷रत नहl लेिकन 7ब ¯लl" 7"त म मह7ू 7 Hा5, युनुस खान Hा5, ि7र7lस 7ी, 7ीबा असलम 7हमी 7ी, 7हर|7
साब Vर कुछ अ¯य ¯ल|"र 7ैसे 37ाहर" Hी ह त| 3नसे कुछ कयl नहl सीखा 7ाता.
अंत म एक बार ि7र ¯ल|"वा"ी, िच™ा7"त Vर अ¯य ¯ल|" सं कलकl से अनुर|U क÷ं "ा िक ]से ¯ल|"l क| िबलकुल पनाह ना 7 7|
यहl माहlल िब"ा7ने की क|ि77 म ल"े ह Vर यि7 कल के ि7न म Hी यही सब करता पाया 7ा3ं त| िबना समय "ंवाए मु5े Hी यहl से
Uüे 7ेकर िनकाल ि7या 7ाए.7ीपक 'म7ाल'
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नेक÷õ---
िििििििि ------->>> िििि 'िििि '
•-
अकस UुंUला प7ा है मेरा
ख| सा "या हू म
7ाने कया-कया ^वािह7 िलए
स| सा "या हू म..
व| हर घ7ी मु5े
"ैर िकये 7ाते ह
म|ह¯बत 7ेखे व"ैर
वैर िकये 7ाते ह..
¯-
अपनी त| आ7त है सम5|, तुमक| िचõाने की
कHी तुमक| सताने की कHी तुमक| हं साने की
कहने क| कह 7ू 7|÷त तुमक| अपनी 7ान से ¯यारा
म"र हर िर°ते क| नाम 7ेने की आ7त है 7माने की
3-
] मे’7बl ]सा नहl िक हम तुमसे ¯यार नहl
खता है व€त की के हम मlका नहl िमलता
तु¯ह पता नहl िक 7ुिनया म Vर Hी ह ता7महल
पर ि7ल से िनकलने का 3¯ह मlका नहl िमलता
7ीपक 'म7ाल'
िि िििि िि ििि िििििििि ---------->>>> िििि 'िििि '
ये कैसी है 7ीत तु¯हारी
ये 7> 35े ह आहl से
ह| लेते ह| खु7 तुम कैसे
5ं सानी चीखl से
कया मकस7 पूरे कर पा7"े
खून सने तरीकl से
िकतने चू„े बु5ा ि7ए
बस अपनी र|õी पाने क|
क|ख सुखाकर िकतनी तुमने
डायन अपनी मl क| िस¿ िकया
अपने घर िकलकारी Hरने क|
Vरl का 7ीप बु5ा डाला
सुख सब प¬े कर डाले
बस मlत नाचती 7ं "ल म
कैसे अब स| तुम पा7"े
7ािपत ह|के 7ापl से
रं ि7त ह|कर आहl से
ये 7> 35े ह आहl से
ये कैसी है 7ीत तु¯हारी
7ीपक 'म7ाल'
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ििििििि िि ििि िििििि -------->>> िििि 'िििि '
बहुत 7ु:ख Hी है Vर तिनक सं त|1 Hी िक 7¯7ी ही हकीकत से '-ब-' ह| "या.. बहुत कुछ स|च कर Vर 3¯मी7 लेकर आया था
¯लl"7"त म लेिकन.... खैर छ|ि7ये यहl बात करते ह पहले अहसास की.. लेिकन 5तना ि7र Hी कहना चाहूं"ा िक 5स चापलूसी
ल|क(¯लl"7"त) म अ¯छे 5ं सl िमले म"र ि7र Hी कम. सब िस7 अपने क| 7ुिनया की न7र म 7ान7ार Vर 7ान7ार बताने म ल"े ह.
5सिलए ]सी 7ुिनया क| मेरा न77ीक आके परखने के बा7 7"ाम, ]सा त| नहl िक Vरl की तरह िच¯ला3ं िक '] Hा5 मेरा हाथ पक7|
म ¯ल|ि"ं" छ|7 कर 7ा रहा हू' लेिकन हl िनयिमत Hी नहl रहू"ा बस कHी आ3ं "ा त| िस7 3स िव1य पर अपनी बात कहने 7| 7÷री
सम5ता हू, कHी कहानी, कHी "7ल, कHी लघुकथा , कHी किवता या "ीत त| कHी प|एम के ÷प म.. Vर 7ाय7 अब 'मिसका"7' पर
कम Vर अपने अ¯य अ7ी7l के ¯लl" पर 7या7ा.. ना मु5े चõके चािहए ना िõ¯प"ी Vर ना िकसी का मान मनlवल.. बस कुछ अ¯छे
ल|"l का ÷नेह चािहए त| िमलता रहे"ा ]सी 3¯मी7 है, नहl Hी िमले"ा त| अ"र म स¯चा ह|3ं "ा त| 3परवाले का आ7ी1 त| िमले"ा ही..
कल ल¯7न से लlõ के आया हू क5 नए अनुHवl के साथ.. कुछ बहुत अ¯छे 5ं सानl से Hी िमला 7| सािह¯यकार Hी ह, साथ ही 3नके
7ीवन के त7ुबlत सुनकर '¯यासा' ि7¯म का अहसास Hी 7ा"ा िक- ''ये 7ुिनया अ"र िमल Hी 7ाए त| कया है''
7ु:ख ह|ता है कहते हुए िक 5स 7"त के 7या7ातर ल|" िस7 अपने क| बहुत अ¯छा सािबत करने के चüर म बहुत अ¯छा करना Hूल
7ाते ह Vर बस एक लकीर पर चलते 7ाते ह अपनी पलक मू7 हुए, पर म िकसी क| सुUारना Hी नहl चाहता बस खु7 ही सुUर 7ा3ं
5तना का7ी है मेरे िलए. हl ि7ं õ मीिडया Vर सािह¯य से 7÷र 7ु7ा रहू"ा.
यहl म अपने पहले अहसास के बारे म बताने 7ा रहा हू 7| िक 7ु7ा हुआ है मेरे िकसी Hी खेल 7l"न(÷õेिडयम) क| 7ेखने क| लेकर..
मने अ"र अपने 7ीवन म क|5 पहला ÷õेिडयम 7ेखा त| व| है ल|ƒस िñकेõ मै7ान ि7से िक 'िñकेõ का मüा' Hी कहते ह Vर 5से
3परवाले का अहसान ही मानूं"ा िक सीUा 3स म7ान क| पहली बार 7ेखने का अवसर ि7या 7हl से िñकेõ 7ु÷ हुआ..
सुबह •¯ ब7े ल¯7न म 3स 7"ह से िनकला 7हl 5हरा हुआ था, िनकलते ही सबसे पहले ल|ƒस ÷õेिडयम के िरसे¯7न पर 7|न
ल"ाया त| पता चला िक •¯ ब7े वाला ि[प पहले ही 7ु÷ ह| चुका है अब म ¯ ब7े पहु ं चूं वही बेहतर था.. त| कुछ समय 5¯पीिरयल
क|ले7 ल¯7न म अपने िम7 की 7य|"7ाला म "ु7ारा 3सके बा7 अपने "ंत¯य का रा÷ता अंत7lल के मा¯यम से पता करके वहl के िलए
7÷थान िकया. पेिडं "õन बस ÷õlप से बस पक7 कर बेकर ÷[ीõ पहु ं चा. वहl पहुच कर पता चला िक अHी Hी ׬ िमनõ बाकी ह त|
पै7ल ही रा÷ता ख|7ते हुए बõ ि7या ल|ƒस की ि77ा म, लेिकन ि7र Hी करीब ¯¤ िमनõ पहले बािर7 Vर ते7 हवा क| 5ेलता वहl
पहुच ही "या.
मेन"ेõ पर 7| सेकयुिरõी "ाड थे त| 3¯हlने अ¯7र 7ाकर िõकõ लेने िक सलाह 7ी लेिकन चूंिक पहले से ही ल¯7न पास था मेरे पास त|
सीUा िरसे¯7न पर 7÷तक 7ी Vर ÷õीकर लेने के बा7 सीUा सं 7हालय म. 7हl "ाव÷कर का व| हेलमेõ रखा हुआ था 7| चीनी िम]ी से
बना था Vर अ÷सी के 77क म 7य|" िकया "या था त| साथ म ही नवाब पõl7ी की त÷वीर Vर लारा का हेलमेõ था. डेिनस िलली िक
]ितहािसक "7 थी त| ि7म लेकर की õे÷õ म •‚ िवकेõ चõकाने वाली "7 Hी, िविवयन िरचƒस का हेलमेõ, क|õ Vर ब¯ला Hी. 7े7
बायक|õ का एक अल" ही सेक7न बना हुआ था. हl सिचन से स¯बं िUत क|5 ची7 नहl िमली अलब¬ा "l"ुली की व| õी-7õ 7÷र थी
7| 3सने वहl ि1लं õ|7 क| िचõाने के िलए 3तारी थी.
िñकेõ का 5ितहास 7ेखा सुना िक िकस तरह के ब¯ले सबसे पहले •š$¤ म चलते थे ि7र कया ÷प आया Vर िकस तरह पहले $ के
ब7ाए िस7 ¯ िवकेõ 7मा कर खेल ह|ता था.. ना पैड थे, ना ¹ल¯स, ना हेलमेõ Vर ना ही क|5 Vर सुरuा 3पकर".
सुनकर हं सी Hी आ5 िक 7ब 5ं ¹लै°ड की õीम पहली बार आ÷[ेिलया "5 त| आ÷[ेिलया ने 5ं ¹लै°ड के •• िखलाि7यl के मुकाबले ¯¯
िखला7ी मै7ान म 3तारे कयlिक 3नका मानना था िक 3नकी õीम बहुत क¯¯ड थी Vर 7ु'आती अव÷था म थी(हु5 ना ब¯चl वाली बात).
वही एक क|ने म 3स िचिडया की मत 7ेह Hी 3सी बlल से िचपकी आ7 Hी रखी है ि7ससे िक 3सकी मlत हु5 थी(एक ते7 "7बा7 की
"7 के रा÷ते म आ 7ाने का खािमया7ा).
ए7े7 की व| असली [l7ी 7ेखी ि7सने 5स "ंखला क| नाम ि7या Vर 3सकी कहानी सुनी त| 7ू सरी 7र W G Grace की पिõं " Vर
मूित 7ेखी. सर ड|न 4ेडमेन की Hी पिõं " 7ेखी Vर ि7र लl7 ÷म 7ेखा 7हl 5ं ¹लै°ड की õीम Vर Hारत की õीम ना°ता Vर खाना
खाती ह, ि7र 3नके •ेिसं " ÷म Vर पिविलयन Vर ि7र व| ÷म 7हl मह¯वपू" िन"य िलए "ए थे 7ैसे िक िरकी पlिõं" क| काबन के
हिडल वाले ब¯ले से ना खेलने 7ेने का िन"य.
व| बालकनी 7ेखी 7हl सlरव ने अपनी õी-7õ 3तारी थी Vर व| 7"ह 7हl सिचन Vर 5िव7 बै5ते ह Vर 7हl अ"रकर ने ल|ƒस म
7तक बना कर अपना 7मखम सािबत िकया.
एक बहुत ही म7े7ार बात 7| बता5 "5 व| ये थी िक W.G.Grace 7| िक एक अ¯छे ि7ि7ि7यन थे व| 7ब एक अ¯छे िñकेõर के ÷प
म 7िसä ह| "ए त| 3नके खेल क| 7ेखने के िलए िõकõ की कीमत • पस से बõाकर ¯ पस कर 7ी "5 Vर तHी यह पहली बार हुआ
िक िकसी िñकेõर ने अपने खेल क| 7ेखने वालl की व7ह से 7ाय|7कl से पैसे की मl" की. 3नका कहना था िक 7ब MCC 3नकी
व7ह से पैसा कम रहा है त| 3¯ह Hी 5सम से िह÷सा ि7या 7ाना चािहए Vर तHी पहली बार िकसी िखलाडी क| 3सके 77ं सकl की
व7ह से पैसा िमला.
3सके बा7 एक बार 7ब व| 7¯7ी आ3õ ह| "ए त| W.G.Grace मह|7य सीUा अ¯पायर के पास 7ाकर ब|ले िक यहl ल|" मेरा खेल
7ेखने आये ह तु¯हारी अ¯पायिरं " नहl.. :)
वहl का 7िसä 7ेसबlकस Hी 7ेखा Vर 3समे बै5ने का म7ा Hी िलया. त| 5स तरह पूरा हुआ मेरा पहली बार िकसी ÷õेिडयम क| 7ेखने
का सपना.
7ीपक 'म7ाल'
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िििििि िि ििििि िि िििि ििििि ..------------------>>> िििि 'िििि '
ये त| सच है िक अपने 7ीवन का पहला अहसास क|5 ब7ी मुि°कल से ही Hूल सकता है. अब वह अहसास अ¯छा है या बुरा 3सका
7क 5तना प7ता है िक बुरे अहसासl क| ल|" बहुत कम Hू ल पाते ह. 5ं सानी ि7तरत ही ]सी है.. 7ेिखये ना हमारे साथ िकये "ए
अहसान हम Hूल सकते ह लेिकन क|5 अ"र हमारा कुछ िब"ा7 7े या हमारे साथ 7ाने -अन7ाने म कुछ बुरा कर 7े त| म7ाल िक हम
आसानी से 3से Hुला 7.
हl त| यहl आ7 एकबार ि7र अपने 7ीवन के एक Vर पहले अहसास का ि7ñ करने 7ा रहा हू.. Vर व| अहसास 7ु7ा हुआ है मेरे
खु7 के साथ घõी पहली 7ुघõना से. आमतlर पर 7ुघõना 7¯7 ब|लने पर मि÷त¯क के š¯ 5ं च के ‡ेत पर7े पर 7| िच7 7uेिपत ह|ता है
व| स7क हा7से से 7ु7ा ही ल"ता है या ि7र 3समे िकसी म7ीन का कहl ना कहl क|5 ना क|5 य|"7ान 7तीत ह|ता है. लेिकन 7ुघõना
िस7 स7क या म7ीन से 7ु7ी ही नहl ह|तl क5 बार आप अपने आप घर बै5े 7ुघõना7ं क| िनमं7" प7 थमा 7ेते ह, 7ैसा िक मने
िकया 7ेिखये कैसे-
''ये पहली 7ुघõना 3स समय की है 7ब म $-š साल का रहा ह|3ं "ा... त| हुआ ये िक मेरी बुआ 7ी ने अपनी 7ा7ी के बा7 अपनी घिन7
सहेिलयl क| Vर HािHयl क| एक पाõl 7ी थी 7ैसा िक Hारत म ये चलन है. मेरे घर के सामने ही एक पािरवािरक िम7 रहते ह ि7नके
साथ मेरे पिरवार के क5 सालl से घर 7ैसे या 3ससे बõकर स¯ब¯U ह, त| 3स पिरवार से एक ब¯चा(ब¯चा 5सिलए िक व| मु5 से Hी ¯
साल छ|õा था) अपनी म¯मी 7ी के साथ पाõl म 7ािमल था. म बहुत छ|õा ह|ने के कार" क|5 7या7ा काम त| नहl कर रहा था लेिकन
हl कHी िकसी क| पानी, सम|सा या 7रबत चािहए ह|ता त| ला 7ेता था. 7ाने 3स ब¯चे का कया मन हुआ िक व| ब|ला िक 3से घर 7ाना
है Vर 3सका ना°ता 3सके साथ िH7वा ि7या 7ाये कयlिक ¯लेõ ब7ी ह|ने की व7ह से 3सके हाथ म ना आए"ी. बुआ 7ी ने मु5से
3सक| 3सके घर तक Hे7 आने Vर ना°ता Hी 7े आने के िलए कहा.
अब मेरे 7|नl हाथl म एक म रस"ु¯ले Vर एक म सम|से.. म आ"े-आ"े चल ि7या. हl त| बताना 7÷री है िक 3नका घर ]सा बना हुआ
था िक मु^य (ार से अ¯7र 7ाकर एक का7ी ल¯बी "ैलरी ि7र आ"न ि7र सीि•यl Vर ि7र छत Vर 3सके बा7 व| कमरे 7हl पर
3सका घर था. हमारे यहl बं 7रl की बहुतायत है 5सिलए र|7 ही 3नसे मु5Hे7 ह|ती रहती है Vर 7ब कHी छत पर "हू या Uान व"ैरह
सूखने के िलए डालते त| ि7र 5न वानर "े7l की कHी-कHी छतl पर पाõl Hी ह| 7ाया करती थी. त| 7ुHl¹यव7 3स ि7न 3नकी छत
पर "हूं सूख रहा था Vर म 3स बालक का नेत¯व करते हुए 7ब छत पर पहु ं चा त| 7ेखा िक करीब •¤-•• ब¯7र छत पर क¯चे "हू
का आनं 7 ले रहे ह. व| ब¯चा त| ब¯7र 7ेखते ही चुपचाप सीिõयl से नीचे 3तर िलया Vर म 7ब तक पलõता िक िकसी 7ाितर ब¯7र ने
मेरे हाथ के रस"ु¯लl पर नीयत Uराब कर 7ी. खु7 त| 5ीक बाकी सब बं 7रl क| Hी 'खl-खl' कर पाõl का माल 37ाने का 57ारा कर
ि7या.
बस ि7र कया था घेर िलया "या मु5े. म Hी कुछ 7या7ा ही अकलमं7 िनकला Vर ये स|च िलया िक Hा5 5¯ह 7े ि7ए त| Vर रस"ु¯ले
कहl से ला3ं "ा? बस ि7र कया था चुपचाप वही बै5 "या Vर 3नके आñम" 5ेलता रहा. अब एक Uरम7र Vर •¤-•• अमरी7 पुरी
त| कब तक बचता Hा5.. 7ब ल"ा िक 3नके 7lत Vर नाखून 7रीर म क5 7"ह त| ल"े ही लेिकन िसर म कुछ 7या7ा ही "7 चुके ह
Vर अब 7या7ा 7ेर की त| मी5े सीरे के ब7ाय 5¯ह मेरे 7रीर म बहता लाल सीरा पसं7 आ 7ाये"ा Vर वैसे Hी हाथ म 7| ¯लेõ थl व|
77 के कार" कब मु™ी म Hlच "यl पता Hी ना चला, त| 7|बारा अकल ल"ा5 िक Hा5 अब छ|7 7े ये सने हुए रस"ु¯ले अब क|5 ना
खाये"ा.
3Uर व| बालक नीचे 7ाके चुपचाप ख7ा रहा Vर िकसी क| 5¬ला Hी नहl िकया िक मेरे साथ कया 7ु¯म ह| "या. :) म कुछ 5स 3¯मी7
म था िक व| िकसी क| बताए"ा त| मेरे रuक क|5 7ेव आय"े, पर ]सा कुछ ना हुआ अंतत: 7ब मने रस"ु¯ले Vर सम|से वही 7क ि7ए
त| सारे ल7ं "े ब¯7र मु5पर 7|र-आ7मा57 छ|7 3नका 5ं õर¯यू लेने के िलए मुखाितब हुए Vर म नीचे 3तर कर आ"न, "िलयारा पार
करता हुआ बाहर चबूतरे पर 7ाकर ख7ा ह| "या.
अब चूंिक मेरा घर स7क पार करते ही सामने ही था त| मेरी म¯मी ने छत से मु5े 7ेख िलया. तब तक मेरी ÷कू ल की स7े7 7õ मु1त म
पूरी सुख ह| चुकी थी. म¯मी त| 7ेखते ही "7 खा कर ि"र "यl Vर 7ब व| ि"रl त| बाकी ल|"l िक न7र Hी मु5 पर 5नायत हु5 िक
म¯मी कया 7ेख कर मूिछत ह| "यl. 7ब तक ल|" आये त| 77 Vर रकत›ाव के कार" ¹लेिडएõर 7ीपक 7ी बेह|7 ह|ने की हालात म
पहुच "ए थे.
बस आनन-7ानन म ता3 7ी के िकलिनक म पहुचाया "या, ि7र कया हुआ 7या7ा या7 नहl हl बस 5तना या7 है िक मु5े चेतन रखने के
िलए डlकõर ता3 अपने बेõे से कह रहे थे िक- '7ेख| िकतना बहा7ुर ब¯चा है •¤ बं 7रl से ल7ा Vर š õlके सर म ल"वाए तब Hी नहl
र|या Vर एक तुम ह| 7| एक 5ं 7ेक7न म र|ते ह|'. अब तारी7 सुन म Hी खु7 क| पहलवान सम5ने ल"ा था 7बिक Hा5 हकीकत म त|
बं 7रl से ल7ा नहl बि¯क िचथा था. :) ''
त| कैसी ल"ी ये राम 3¯स 7ीपक कहानी?? यािन बं 7रl से िचथने का पहला अहसास.. वैसे आिखरी Hी त| यही था कयlिक 5सके बा7
बं 7रl का आतं क मन से ]सा िनकला िक 7ब Hी ब¯7र 7ेखता त| 3नकी तर7 खाली हाथ ही 7l7 प7ता Vर अबकी व| बेचारे Hा" रहे
ह|ते मु5े 7ेखकर..
7ीपक 'म7ाल'
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7|÷तl यूं त| ि7ं 7"ी की अ7¯यu ल¯बा5 वाले स7र म हम क5 अहसासl से ÷ब÷ ह|ना प7ता है, क5 चाहे अनचाहे अहसासl से हमारी
मुला€ात कराती है ये ि7¯7"ी नाम की हसीना.... लेिकन हर अहसास की कHी ना कHी 7ु'आत ह|ती है, िकसी की ि7¯7"ी
म क|5 अहसास बहुत पहले ह|ता है त| कHी िकसी की म बहुत बा7 म. लेिकन मेरे ^याल से हर िकसी क| ल"H" एक 7ैसे अहसास से
"ु7रना ही प7ता है, हl 3नके ÷प रं " अल" ह| सकते ह 5तना 7÷र है........Vर 7ब िकसी अहसास की हमारे 7ीवन म 7ु'आत
ह|ती है त| 3से हम कHी नहl Hू ल पाते, कयlिक वह, 3स तरह का हमारा पहला अहसास ह|ता है 7| िक 7ीवन Hर के िलए अिव÷मर"ीय
या7 बन के ता7े सीमõ पर बनाये "ए पैरl के िन7ान िक तरह हमे7ा के िलए हमारे ि7ल Vर ि7मा" पर छप 7ाता है.....हम अ"र 3से
या7 ना Hी करना चाह तब Hी व| अपने आप या7 आ ही 7ाता है, 5ीक वैसी ही खु7बू, 5ीक वैसे ही ताप, वैसी ही हवा, वैसी ही आ5ता का
माहlल बनाते हुए.......
अनि"नत पहले अहसासl म से एक वैसा ही अहसास मेरे सामने अपने आप ही आकर ख7ा ह| 7ाता है Vर मु5े खlच ले 7ाता है 3स
समय म 7ब मु5े अपने 7ीवन का पहला कप एक पुर÷कार के ÷प म िमला था(म पõा5 के अलावा अ¯य कायकलापl म िमलने वाले
पुर÷कारl की बात कर रहा हू)....
7या7ा पुरानी नहl बस सन •‚‚$ की बात है, 7ब म सर÷वती िवदा मंि7र, "¯ला मंडी, कlच का š वl कuा का छा7 था, पõा5 म
अ¯बल त| नहl था लेिकन हl ि7र Hी तीसरे-चlथे नं बर पर रहता ही था. 7ारं H से ही कला िव1य म मेरी "हरी ÷िच थी Vर ये बात सबपे
7ािहर ह| चुकी थी कयlिक 7ाय7 मेरे हाथl से स7े7 का"7 पे आ7ी ितरछी ि"रती रेखाएं कला के आचाय 7ी क| मेरे अ¯य सािथयl से
बेहतर ल"ती थl....
हमारे ि7ले म एक ¯यिकत"त सं ÷था 'लिलत कला अका7मी, 3र5' (ारा हर व1 एक ि7ला ÷तरीय बाल कला 7ितय|ि"ता का आय|7न
ह|ता था. 3स व1 िवदालय का 7ितिनिU¯व करते हुए $ अ¯य विर7 छा7l के साथ मु5े Hी 3समे Hा" लेने का अवसर िमला. 7ितय|ि"ता
एक क¯यािवदालय(नाथूराम पुर|िहत बािलका िवदालय) म आय|ि7त ह|ने के कार" मन म एक अ7ीब सी घबराहõ त| पहले से ही थी की
अ"र िच7 अ¯छा नहl बना त| ल7िकयl के सामने बे577ती ह|"ी. 7ेिखये आप िक 3तनी छ|õी सी 37 म Hी 577त-बे577ती का ^याल
पनपने ल"ता है... खैर Vर क5 िवदालयl से आये करीब …¤ 7ितHाि"यl के साथ म 7ब वहl पहु ं चा त| पता चला िक 'मेरे 7हर का
मेला' िव1य पर हम सबक| सीिमत समयाविU म एक रं "ीन िच7 बनाना था.. कlपते हाथl से ल"ा िच7 बनाने .. रं " Hी Hर ि7या.... साथ म
कनिखयl से Vरl के Hी 7ेखते 7ाता िक कहl मु5से बेहतर त| नहl बन रहा है.....कहl क|5 मु5से 7¯7ी त| नहl बना रहा
है.... खासकर ल7िकयl से डर था Vर एक ल7के से 7| िक 7हर के म7हूर पõर का सबसे छ|õा बेõा था लेिकन था व| Hी कमाल
का िच7कार....
करीब • घं õे की म7üत के बा7 िच7 बन त| "या लेिकन Vरl के िच7 7ेखता त| कहl ना कहl कसक 35ती िक 'यार 5सने 7| ची7
डाली है व| म Hी डाल सकता था लेिकन म कयl नहl स|च पाया? 7ये 3सकी कु¯7ी वाले िक कमी7 लाल अ¯छी ल" रही है मने हरी
पिहना 7ी... 3सने त| 5ूले म … पालिकयl बना† मने $ ही... अरे 5सने त| मेले म बािर7 Hी ि7खा 7ी अब 5सका त| 5नाम पüा...'
व"ैरह व"ैरह
अब बै5 "या मन मस|स कर Vर ल"ा स|चने िक 'बेõा 7ीपक तुम त| िनकल ल| पतली "ली से, ये तु¯हारे बस का र|" नहl, ल|"l क|
तु5से क5 "ुना 7या7ा कला िक सम5 है.... आि7 आि7.'
करीब आUे घं õे के बा7 पिर"ाम घ|ि1त हुए त| सबसे पहले तीसरे ÷थान 7ा¯त मेरे एक विर7 क| बुलाया "या त| मन 7ं का से Hर 35ा
िक '5न Hैया क| िपछले साल 7ब 7थम ÷थान िमला था त| म सराहनीय पाया था, 7ब 5स बार 5¯ह खु7 ही ततीय िमला त| तेरा कया
ह|"ा कािलए?'
7ू सरे ÷थान के िलए 7ैसी िक 3¯मी7 थी न"र के पõर मह|7य के बेõे क| बुलाया "या.... म बै5ा रहा ल7िकयl से न7र बचा के 7ीवाल
ताकने ...
म"र अचानक 7थम ÷थान के िलए ल"ा 7ैसे एक नाम 7ीपक कुमार चlरिसया िन"lयक मह|7य ने पुकारा ह|...
मु5े अपने कानl पे िव‡ास नहl हुआ Vर ल"ा िक क|5 Vर 7ीपक ह|"ा.... लेिकन 7ब ¯ बार 3¯हlने ि7र से िवदालय का नाम लेकर
बुलाया त| 7रीर म कुछ हलचल हु5.. लेिकन 35ने की िह¯मत ही नहl हु5, पैर 7ैसे 7मीन पे िचपक "ए... अब पुर÷कार लेने 7ाए त|
कैसे 7ाए मेरे त| पैर कlपे 7ा रहे थे Hा5, 5स अ7¯याि7त िन"य(आघात) से ... तHी मेरे ही एक विर7 Hैया 7ी ने मु5े िहलाया Vर कहा
7ीपक Hा5 7ा7 तु¯हारा ही नाम पुकार रहे ह मुबारक ह|!!!! तब 7ाके िकसी तरह म ख7ा हुआ Vर ल"H" 7l7ता सा ÷õे7 पर
पहु ं चा, पुर÷कार लेते समय आखl के सामने अUेरा छा "या, ि7र Hी 7ैसे तैसे अपने ि7ल की U7कनl पर काबू पाते हुए... कप क| अपने
हाथl म लेके सीने से िचपõा िलया.. ]से 7ैसे िक व| वापस छीन ल"े... Vर अपनी 7"ह वापस आने के करीब •¬-¯¤ िमनõ बा7 7ब
सामा¯य हुआ त| मन बि¯लयl 3छल रहा था Vर 5ूमने का मन कर रहा था..... ल"ता था की सारी 7ुिनया क| िच¯ला िच¯ला के बता 7ू ं
िक मने कया 7ीता है.....ह| ना ह| आUे म|ह¯ले क| त| व| कप ि7खाया ही था.....
त| ]सा था मेरा पहला कप 7ीतने का अहसास, ि7सके बा7 7ीवन म क5 पुर÷कार िमले कHी ि7uा के िलए त| कHी किवता-कहानी के
िलए, कHी अिHनय के िलए त| कHी सामा¯य Hान के िलए...... यहl तक िक 3सी िच7 पर ि7ला ÷तर पर Hी ि(तीय ÷थान िमला म"र
3स अहसास के 7ैसा अहसास, ि7र कHी नहl हुआ... यहl पर एक आव°यक 7ाथना Hी सुना रहा हू 7| अकसर 7Hु से करता रहता
हू......ि7सके िबना ये प|÷õ अUूरी है......
5क हाथ
कलम 7ी 7ेव मु5े,
7ू 7े म
कू ंची पक7ा 7ी,
संवा7 मं च पर ब|ल सकू ं
]सी है तुमने ि7œा 7ी.......
पर 5तने सारे म हुनर िलए
कहl िव7ल िस¿ ना ह| 7ा3ं ,
तूने त|
"ु" Hर ि7ए बहुत,
खु7 7|1युकत ना ह| 7ा3ं .
Hूखे ब¯चl के पेõl क|
कर सकू ं अ"र,
त| त¯त क'...
7| बस माथ तु¯हारे चõता ह|
व| Uवल 7ु¹U ना ह| 7ा3ं ......
5तनी सी रखना कपा 7H|
म आ¯ममु¹U ना ह| पा3ं ......
म आ¯म मु¹U ना ह| पा3ं ....
7ीपक 'म7ाल'
--------------------------------
खाम|7!!!नेता7ी 7lरे पर ह....
आ7 नेता 7ी क| 7lरे पर 7ाना है. सारी तैयािरयl का 7ाय7ा िलया 7ा रहा है, असल म है कया िक आ7 के छिव-सुUार ि7ƒयूल म
नेता 7ी क| "म7ान करना है, पै7ल चलना है, र÷ते म कार र|क सम|से खरी7कर खाना है Vर सबसे बा7 म एक हिर7न के यहl खाना
खाना Vर स|ना है. पहले से तैयािरयl के चलते अ7सरl की एक õीम पहले ही "lव की तर7 "5 हु5 है. एक सेñेõरी सब ¯यव÷था7ं
का पुनरीu" कर रहा है.
नेता 7ी के खासमखास ''आ7मी' ने एक चमचे क| बुला कर कहा- ''7ेख|, मीिडया वालl क| खबर कर के बुला ल| Vर 3नकी 7म के
खाितर7ारी करना Vर सम5ा 7ेना िक अपने खबिरयl क| कह 7 िक ये खबर तब तक लीक नहl ह|नी चािहए.. 7ब तक िक 7lरा पूरा
ना ह| 7ाए. हl 7lरे के बा7 ये समाचार बनाना िक नेता 7ी ने अचानक 7lरा िकया Vर स¬ा÷õ पाõl के रा7 म 77ासन 5तना चु÷त-
7ु'÷त है िक 7े7 का 5तना ब7ा युवा नेता 7lरा करके चला "या Vर िकसी क| कान|-कान खबर Hी ना ल"ी.''
कहकर वापस अ¯7र नेता 7ी क| स7ाने -संवारने के िलए अ¯7र 7ाने ल"े त| अचानक कुछ Vर ¯यान आया... पलõ कर आये Vर
ब|ले-
''अरे सुन|, 3Uर 77ासन के सHी ब7े अ7सरान के घर िम5ा5 के ड¯बे िH7वा कर 3¯ह Hी बतला 7ेना िक तरüी चाहते हl त| थ|7ा
सा अपमान सह Vर 7lरे के बा7 ही अपनी "ाि7यl 'मुक¯मल' ÷थान की तर7 7lडाएं. ''
कायlलय के 7ू सरे कमरे म एक 7ू सरे खास आ7मी 7ी िल÷õ िमला रहे ह-
''¯लाि÷õक का तसला ले िलया, थमlक|ल के बने रं "े हुए प¯थर ले िलए, नेता 7ी के कुरते क| म77ू र के कुरते का लुक 7ेने के िलए
मõमैला च¯7न ले िलया, ि7न म77ू र युवितयl के साथ नेता 7ी िम]ी •|एं "े 3नका चयन खूबसूरती के आUार पर ह| "या है Vर 3¯ह
िह7ायत 7े 7ी "5 िक अ¯छे से नेता7ी (ारा िH7वाये "ए खु7बू7ार साबुन से मल-मल कर नहा कर आय Vर •ेर सारा िडय|5õ Vर
पर1यूम ल"ाना ना Hूल, व"ैरहव"ैरह...''
नेता 7ी का कारवl स7 चुका है Vर 7ेड ¯लस ¯लस ¯लस सुरuा के अितिरकत ¯ अ¯य "ाि7यl, 7| िक िन7ी कं पिनयl के
सुरuाकिमयl से Hरी थl काि7ले के आ"े पीछे ल"ा 7ी "5 ह. एक "ाडी म नहाने Vर पीने के िलए िमनरल वाõर Hर िलया "या है. 5स
तरह नेता 7ी ि7ं 7ाबा7 के नारे के साथ सHी •…-¯¤ "ाि7यl का 'छ|õा' सा काि7ला बीह7 के एक "lव की तर7 रवाना ह| "या. नेता
7ी ने रा÷ते म प|लेरा5ड ¹लास वाला काला च°मा ल"ा िलया है Vर सेñेõरी क| "lव के बाहर ही च°मा 3तारने की या7 ि7लाने के िलए
Hी कह ि7या ि7ससे िक 3न पर हा5-7ा5 बनने का 5ल7ाम ना ल"े.
नेता 7ी एक 7ू र77l '5ं सान' ह 5सिलए रा÷ते म ही अपने UासमUास से पूछ िलया िक- ''सम|से वाले के यहl अपने रस|5ये Hे7 कर
हा57ीिनक सम|से बनवा के रखे या नहl?''
7वाब से सं तु7 ना हुए Vर खु7 ही रस|5ये से बात कर 3सपर 3पकार िकया. 3सक| ब|ला िक- ''िकसी तरह की "7ब7 नहl ह|नी
चािहए सम|से खाकर, कल एक Vर 7lरे पर 7ाना है ना. तु¯हारे साथ 7|õ| Hी िनकलवा ल"े अ"र अ¯छे बने त|.''
असल म वे अपने बे7कीमती 7ीवन के साथ क|5 खतरा म|ल नहl लेना चाहते थे.
"lव पहुचते ही च°मा 3तारा "या, नेता 7ी "lव के ब7े-बु7ु"lं से िमले Vर ि7र "म7ान ÷थल पर पहु ं च "ए. लेिकन ये कया 3117 आ7
Uूप 5तनी कम.... खैर 3सका Hी 5ं त7ाम ह| "या िमनरल वाõर से नेता7ी के कप7l Vर चेहरे पर पसीने का मेकअप िकया
"या(आिखर मेकअप व|मेन क| साथ म लाना ¯यथ नहl "या).
नेता 7ी के आ"े-पीछे म77ू र Vर बीच म नेता 7ी. अब िम]ी डालने का 7ुHकाय 7ारं H ह| "या Vर मीिडया 7| िक घं õl से 5स
]ितहािसक u" की बेस4ी से 7तीuा कर रही थी 7¯7ी 7¯7ी नेता 7ी के क5 क|"l से प|7 लेने म ल" "5.
वहl से िनपõकर काि7ला आ"े बõा Vर 'सुिनि•त' सम|से की 7ुकान पर 'अचानक' 'का. लेिकन हाय िकसी ने ¯यान ही नहl ि7या
3नकी तर7... िसवाए सम|से वाले के, ि7से पहले से सब Hात था. काि7ले म से ही एक चमचा िच¯लाया- ''अरे 5तना ब7ा नेता 5तनी
छ|õी Vर 'अनहा57ीिनक' 7ुकान पर सम|से खा रहा है, िकतने ब7े ि7लवाला है, हमारा स¯चा िहतै1ी है. हमारी ही तरह का है.'' Vर
ि7ं 7ाबा7 के नारे ल"ने 7ु÷ ह| "ए.
मीिडया त| पहले ही पीछे ल"ी हु5 थी. वहl Hी ¯-$¤¤ 7|õ| िनकाल डाले.
अब 7ाम क| 7िलत ब÷ती के एक सबसे सा7 म"र ि7र Hी डेõ|ल से × बार U|ये "ए घर म नेता 7ी पहु ं चे. पिरवार की Uुली-पुंछी
वय|व¿ मुिखया के साथ 7|õ|7ेसन चला. 7ाम क| पास के ही प•च िसतारा ह|õल से मं"वाया "या खाना सा7 से बतनl म 37ेल कर
बाहर लाया "या Vर मीिडया के सामने िकसी ने पीछे से कहा- ''7ेिखये 7िलतl के घर का खाना खा रहे ह, कया 7ेवता ÷व'प आ7मी
ह!!'' नेता 7ी ि7र ि7ं 7ाबा7 हुए.
5सी तरह रात म सारे काि7ले Vर मीिडया के साथ 3सी पिरवार के साथ रात "ु7ारी.
सुबह तडके काि7ला वापस कायlलय की तर7 रवाना ह| "या. कुछ 7ेर म एस.पी. Vर डी.एम. की "ाि7यl 3स हिर7न के घर पहुची
7हl नेता 7ी 'के थे. सब 5ीक तरह से सं प7 ह| "या.
आ7 के अिUकl7 अखबार त| 3नकी तारी7l म रं "े हुए थे. लेिकन पता नहl कयl मीिडया का एक व" नारा7 ह| "या, ि7सने िक 3नके
"म7ान म किमयl िनकालते हुए त÷वीर िनकाल 7ी. बेव7ह खबर क| 3छाला Vर कहा "या िक "िमक के हाथ म ल|हे का तसला था
Vर नेता 7ी के म ¯लाि÷õक का, "िमक के तसले म 3पर तक प¯थर-िम]ी Hरी थी 7बिक नेता 7ी का खाली था. यही तुलना 3नके
÷प|‘स 7ू7 Vर म77ू र की च¯पलl म हु5. ह7 ह| "5 7रा7त की.. बेचारेनेता7ी ने 5तना सब िकया 5स बे77 7नता के िलए Vर
नती7ा कया िमला?'' खैर नेता 7ी ने तुरत-7ुरत अ"ले कायñम के िलए नया तसला, 7| िक ¯लाि÷õक का ह| लेिकन ि7खने म ल|हे
का ल"े, बनवाने का ~डर 7े ि7या साथ ही कुछ Vर थमlक|ल के रं "ीन प¯थर 7| असली से कहl कमतर ना हl. आिखर म 3स
अखबार के हेड आि7स 7|न ल"ा कर 3सके ची7 क| नेता 7ी के साथ िडनर पर आमंि7त िकया "या. 7ीपक 'म7ाल'
बी7
Vर आ7 तुम लõके िमले ह| 7lसी पर
म"र ि7र Hी 7ही7 ना बन पाए
अनि"न ^वाबl के बी7 अनि"नत
तुमने र|पे मेरी आखl म
Vर चले "ए िबन सlचे ही
मैने क5 बार स|चा
Hून डालू 5न बी7l क|
अपने "ु÷से की आ" म
क5 बार पूछना चाहा
कब स|ना 3"ले"ी 7मीन
कब अना7 से Hर"े खिलहान
कब िखंच पाये"ा 7ा7
हकीकत के सरकारी का"7 पर
खालीपन से सं त¯तता की तर7 बõता हुआ

अ¯मा की कप7े U|ने वाली 3स मु"री से
7ब पहली बार "7 क| पीõा था
त| 57ाõे7ार तमाचा िमला था 5नाम तुमसे
5स क7े िन77 म पा" के िक
िकसान का बेõा बने"ा िस7 िकसान
Vर एकि7न 5lका "या था ब¯ले क| चू„े की आ" म
7ब 7ीत के लाया था म
मl7े के सबसे बेहतर ब¯लेबा7 का िखताब

अंकुिरत ह|ने से पहले ही
तुमने कर 7ी थी "ु7ा5 3न बी7l की
7| िछपाए थे खु7 म अि÷त¯व एक 3Hरते िखला7ी का
ि7र 3¯हl म 7बरन ब| ि7ए
7" के अ77ाता बनने के सपने वाले बी7
सम5ा के िक बी7 ही है आ¯मा िकसान की
बी7 ही है 7ान 5स 7ुिनया की..

ि7न-बा-ि7न बािर7 िबना लीलती रही ये सूखी 7मीन
हमारी खा7, हमारी आ¯मा
Vर हर अ"ले साल
पुरानी क| छ|7े ब"ैर पक7ते "ए
€7 के कlõl वाली एक नयी डाली

खुि7यl ि7सलती "यl
अचार के तेल म सनी च¯मच की तरह
त| कHी "ीले हाथ से िनकलते साबुन की तरह
ना 7ाने कयl ल"ा था तु¯ह
हमारे 3"ाये कर|7l Vर अरबl 7ाने "ेहूं के
हम बना 7"े अ77ाता 7ुिनया का

कयl ल"ा िक व| 3प7
बेहतर ह|"ी िकसी िखला7ी के ब¯ले से 3प7े
चार, पlच या छ: छül से
Vर ब7ले म िमल 7ाय"े तु¯ह Hी
लाखl नहl त| कुछ ह7ार 'पये ही सही
7| आय"े काम चुकाने क| €7
चलाने क| 7ीवन..

हरकयुिलस की तरह
क7lं की Uरती का ब|5 तुम मु5से कहे ब"ैर
िमरे कlUl पर कर "ए ÷थानlतिरत
Vर आ7 तुम लõके िमले ह| 7lसी पर
म"र ि7र Hी 7ही7 ना बन पाए...
7ीपक 'म7ाल'
अUूरी 7ीत
तु¯हारे सच के लेबल ल"ी 7ा5लl म रखी
5ू5ी अि7यl म से एक क|
एक क÷बा5 नेता की 7लाली के 7िरये
मेरे कुछ अपने ल|"
हकीकत के थ|7ा करीब ले आये

आ7 ब|लने प7े क5 5ू5 मु5े
एक सच क| सच सािबत करने के वा÷ते
व| 5ू5 7| तु¯हारे ही एक
कानून के घर म सU ल"ाने वाले िव7े1H ने
िलख कर ि7ए थे मु5े

कत5 नामुमिकन नहl
िक कुछ Hी अ7ीब सा ना ल"े 5सम तु¯ह
कयlिक तु¯हारे िलए ह| चुका है ये
7lत मl7ने 7ैसा
पर मेरे िलए अHी Hी अ7ीब
या 7ाय7 बहुत अ7ीब ही है ये
िक मेरे सच की कमा5
एक 5ू5 क| 5ू5 सािबत करने म ल" "5

िकसी ने कहा Hी त| था पीछे से
िक 'कुछ खच हुआ त| हुआ
पर सच 7ीत ही "या आिखरकार'
Vर आ7 म एक िबन िकये अपराU का
छ|õा सा अपराUी बन
मुचलके पर िरहा ह| रहा हू
अब बस 5ं त7ार है
कल के अ7ालती चüरl का..
7ीपक 'म7ाल'
िि िििि िि ििि िििििििि ---------->>>> िििि 'िििि '
ये कैसी है 7ीत तु¯हारी
ये 7> 35े ह आहl से
ह| लेते ह| खु7 तुम कैसे
5ं सानी चीखl से
कया मकस7 पूरे कर पा7"े
खून सने तरीकl से
िकतने चू„े बु5ा ि7ए
बस अपनी र|õी पाने क|
क|ख सुखाकर िकतनी तुमने
डायन अपनी मl क| िस¿ िकया
अपने घर िकलकारी Hरने क|
Vरl का 7ीप बु5ा डाला
सुख सब प¬े कर डाले
बस मlत नाचती 7ं "ल म
कैसे अब स| तुम पा7"े
7ािपत ह|के 7ापl से
रं ि7त ह|कर आहl से
ये 7> 35े ह आहl से
ये कैसी है 7ीत तु¯हारी
7ीपक 'म7ाल'
-------------------
बेतरतीब सा म
मु7े-तु7े िकसी बी7ी के ब°डल की तरह के
िसकु7नl वाले 3स कुरते क|
हलकी सी सीयन 3U7ी 7lस के 3पर डाल
चल ि7या था 3सके घर की तर7 अनायास ही..
त|7 ि7या था मेरी ि77 क|
3सकी ह1ते Hर पहले 7ायी
3स च]ानी नरा7"ी ने ..
यू त| िह¯मत ना थी
िक घर म अ¯7र 7ाके
सीUे मl" लेता मुआ7ी 3ससे
अपनी 3स "लती की ि7सके िलए िक
अHी तक म ना मान पाया था 7|1ी खु7 क|..
3सके घर के सामने के 5क
77l की 7ुकान पर ख7ा ह|
करने ल"ा था 5¯ते7ार
कप7े सुखाने के िलए
3सके बालकनी म 7कõ ह|ने का..
स|च के त| आया यही था
िक मना लू"ा आ7 ÷5े िििि िििि िि
Vर अपने छ|õे से घlसले म
खुि7यl की 57 V ि7वाली
ले आ3ं "ा वापस.
स7क के 7ू सरे छ|र से अचानक 3Hरी
सैक7l छछू ं7रl के समवेत ÷वर म
चीखने की सी एक आवा7 ने
7l7ा िलया था मु5े अचानक ही अपनी 7र..
क|5 कार थी 7ाय7 ि7सने
7बतक की थी क|ि77
काबू म लाने की, अपनी ÷व¯छं 7 र7तार क|
तब तक कुचल चुका था
3स अपं " िHखारी के अ¯पिवकिसत से पैरl क|
Vर सपlले अं 7ा7 म 7l7ा ले "या था
अपनी कार क|, व| "रीब क| कुचलने वाला..
3स 77 से त7पते असहाय क|
तमा7े की तरह 7ेखती Hी7 ने
म7बूर कर ि7या मु5े स|चने क| िक
'ििि िििि िििि िििििि िििि िि िििि'
Vर अब म र|क रहा था एक õैकसी
ह÷पताल 7ाने के िलए.
िििि 'िििि'
कारे-कारे से 7ी7े ह
37रा-37रा सा है का7र
"ूं"ेपन के 'नकl से िमल
बनती है 5स 7ु" की 5l5र
7ाने कहl ह सरमनपूत
"5 कहl कlUे की कlवर
कहl सुबीती है महतारी
5ुला सके 7| लाल की चlवर
Uुंआ सा बन 37 "ए कहl सब
व| 7ेम के िर°ते, ब7l का आ7र
Hूखे क1क की ला7 पे िरमि5म
िकतनी 7|र से बरसे बा7र
िि ििििििि..
बहुत िसखाया था 3सने 7ू र रहना बुरा5 से
हरेक बात पे õ|का.. था सम5ाया था
एक िकताब की तरह 7ी थी ि7¯7"ी
ि7समे िलखे थे 7ीने के िनयम
Vर मतलब 7ीने का .
'िक कय| आये ह हम 7मl पर
ये मकस7 Hुला ना 7
सीख ल अपने पैरl पर ख7े ह|ना
अपने ि7मा" से अपनी तरह स|चना
तरüी करना Vर . चैन से रहना'
म"र 3सके Hर|से क|..त|7ा हर क7म हमने
हु5 7ु'आत बुरा5 की 3सी ि7न से ..
7ब आते ही 7मl पर..
3तार 7की ि7¯7 हमने ..ि7¯7"ी की िकताब की
Vर चõा बै5े न5 ि7¯7.. पसं7 की अपनी-अपनी
अब तकली7 से 3सके सीने क| र|7 Hरते ह
बस 5क 5ू5ी सी बात पे.. हम हर र|7 ल7ते ह
अपनी ि7¯7 क| असली बताते हुए
आपस म 5"डते ह
िििि 'िििि'
7िन की छाया
पू7ा के िलए सुबह मुहअUेरे 35 "या था व|, Uरती पर पlव रखने से पहले 7|नl हाथl की हथेिलयl के 77न कर 7ात:÷मर" मं7 "ाया
'करा7े बसते लŽमी.. कर म¯ये सर÷वती, कर मूले तु.....'. िपछली रात 7ेर से काम से घर लlõे प7|सी क| बेव7ह 7"ा ि7या अन7ाने म.
7ने3 क| कान म अõका सपरा-ख|रा(नहाया-U|या), बा" से कुछ 7ू ल, कुछ किलयl त|7 लाया, अõारी पर से ब¯चl से छुपा के रखे पे7े
िनकाले Vर Uूप, च¯7न, अ"रब¬ी, अuत Vर 7ल के ल|õे से स7ी थाली ले मंि7र िनकल "या. र÷ते म एक हिƒडयl के •lचे 7ैसे
ख7ैले कु¬े क| हाथ म िलए डं डे से मार के H"ा ि7या.
Uु7ी-Uु7ी मं ि7र पहुच िविUवत पू7ा अचना की Vर लlõते समय एक िHखारी के बõे हाथ क| अन7ेखा कर 7सा7 बचा कर घर ले
आया. मन ि7र Hी 7lत ना था...
7ाम क| एक 7य|ित1ी 7ी के पास 7ाकर 7ुिवUा बता5 Vर हाथ की हथेली 3सके सामने िबछा 7ी. 7य|ित1ी का कहना था- ''आ7कल
तुम पर 7िन की छाया है 5सिलए की "5 क|5 पू7ा नहl ल" रही.. मन अ7lत ह|ने का यही कार" है. अ"ले 7िनवार क| घर पर एक
छ|õा सा यH रख ल| म पूरा करा 7ू ं"ा.''
'अ7lत मन' की 7lित के िलए 3सने चुपचाप सहमती म सर िहला ि7या.
7ीपक 'म7ाल', लघुकथा
यूिनविसõी ने 7ब से क5 नए क|स 7ु÷ िकये ह, तब से नए छा7l के रहने की 3िचत ¯यव÷था(हl÷õल) ना ह|ने से यूिनविसõी के पास
वाली काल|नी के ल|"l क| एक नया ¯यापार घर बै5े िमल "या. 3स नयी बसी काल|नी के ल"H" हर घर के कुछ कमरे 5स बात क|
¯यान म रखकर बनाये 7ाने ल"े िक कम से कम •-¯ कमरे िकराये पर 7ेना ही 7ेना है Vर साथ ही पुराने घरl म Hी ल|"l ने अपनी
आव°यकता7ं म से एक-7| कमरl की कõlती कर के 3¯ह िकराए पर 35ा ि7या. ये सब कुछ ल|"l क| 7ाय7ा 7÷र 7ेता था लेिकन 5ा
साब 5स सब से ब7े परे7ान थे, 3नका खु7 का बेõा त| ि7¯ली से 5ं 7ीिनअिरं " कर रहा था लेिकन ि7र Hी 3¯हlने 7|र-7राबे से बचने
के िलए क|5 कमरा िकराए पर नहl 35ाया. हालlिक का7ी ब7ा घर था 3नका Vर व| खु7 Hी िरõायर ह|कर अपनी पžी के साथ 7lित
से वहl पर रह रहे थे लेिकन कुछ ि7नl से 3¯ह 5न ल7कl से परे7ानी ह|ने ल"ी थी.
असल म यूिनविसõी के आवारा ल7के 7ेर रात तक घर के बाहर "ली म चहलक7मी करते रहते Vर 7|र मचाते रहते, लेिकन आ7 त|
ह7 ही ह| "5 रात म साõे बारह तक 7ब 7|र कम ना हुआ त| "ु÷से म 3¯हlने 7रवा7ा ख|ला Vर बाहर आ "ए.
''] ल7के, 5Uर आ7'' "ु÷से म 5ा साब ने 3नमे से एक ल7के क| बुलाया.
लेिकन सब 3नपर हं सने ल"े Vर क|5 Hी पास नहl आया, ये 7ेख 5ा साब का "ु÷सा Vर बõ "या.. वही से िच¯ला कर ब|ले- ''तुम ल|"
चुपचाप पõा5 नहl कर सकते या ि7र क|5 काम नहl है त| स| कयl नहl 7ाते? •ी5 कहl के''
एक ल7का हाथ म 7राब की ब|तल िलए 3नके पास लडखडाता हुआ आया Vर ब|ला- '' ] अंकल कयl õ7न लेते ह, अHी चले 7ाय"े
ना थ|7ी 7ेर म. अरे यही त| हमारे खेलने -खाने के ि7न ह..''
7राब की ब7बू से 5ा साब Vर Hी H7क "ए- '' िबलकुल 7म नहl आती तु¯ह 5स तरह 7राब पीकर आवारा"7l कर रहे ह|.. अरे मेरा Hी
एक बेõा है तु¯हारी 37 का लेिकन म77ाल िक कHी िस"रेõ-7राब क| हाथ Hी ल"ाया ह| 3सने , कयl अपने मl-बाप का नाम Uराब रहे
ह| 7ािहलl..''
3नका ब|लना अHी 'का Hी नहl था िक एक 7ू सरा 7राबी ल7का 3नl7ा सा चलता हुआ 3नके पास आते हुए ब|ला- ''अरे अंकल, आप
िनि¯7कर रिहये आपके 7ैसा ही कुछ हमारे मl-बाप Hी हमारे बारे म सम5ते ह 5सिलए आप 7ा के स| 7ा5ये.. खाम^वाह म हमारा म7ा
मती Uराब किरए.''
Vर व| सब एक 7ू सरे के हाथ पे ताली 7ेते हुए 5हाका मार के हं स ि7ए.
अब 5ा साब क| क|5 7वाब ना सू5ा Vर 3¯ह अ¯7र 7ाना ही 5ीक ल"ा.. 3नका मकस7 त| पूरा ना हुआ लेिकन 3स ल7के की बात
ने एक 7क 7÷र पै7ा कर ि7या.
िििि 'िििि'
3सके कं Uे पे हाथ रख कर पहली बार 5तनी आ¯मीयता से बात करते हुए 3स सुपर ÷õार पु7 ने वीर7र, 7| िक 3सका •ा5वर था, क|
अपनी परे7ानी बताते हुए कहा-
''यार वीर7र, मु5े पहली बार िकसी बहुत ब7े डायरेकõर के साथ काम करने का मlका िमला है..''
''ये त| ब7ी खु7ी की बात है सर'' अपनी खु7ी 7ािहर करते हुए वीर7र ब|ला
''लेिकन र|ल कुछ ]सा है िक व| तेरी म77 के िबना पूरा नहl ह| सकता..'' अपनी बात क| आ"े बõाता व| नया 'हीर|' ब|ला..
''व| कैसे सर....'' अब वीर7र 3स अचानक 3म7े 7ेम का कार" कुछ सम5 रहा था
''मु5े एक ब7े ÷õार के •ा5वर का र|ल िमला है 7| िक कहानी का मु^य चिर7 है.. एक तु¯हारे 7ैसे "रीब, म7बूर आ7मी का र|ल है...
5सके िलए मु5े तु¯हारी ि7नचयl.. 35ना-बै5ना, रहन-सहन सम5ना ह|"ा ब÷स.. कुछ ि7न के िलए'' अपनी म7बूरी बताते हुए Vर वीर7र
की 7ेब म •¤¤¤-•¤¤¤ के •¤ करारे न|õ घुसे7ता हुआ व| तथाकिथत हीर| ब|ला..
''लेिकन सर ये त|...'' अपनी ÷वािमHिकत ि7खाने के िलए 'पये लेने से 5ं कार करता व| कुछ ब|लना चाहता था...
''अबे रख ले चुपचाप साले.. अब 7या7ा मुह मत ख|ल वनl 5तना Hी नहl 7ेता .. व| त| मेरी म7बूरी है आ7 तक िकसी '÷लम डl"' की
ला57 क| करीब से नहl 7ेखा.. 5सिलए.. ििििि ििि ििि ििििि िि िििि िििि िििि...'' अचानक •ा5वर क| 3सकी
Vकात बताते हुए 3सने ि57क ि7या..
हl5 त| चुप रह "ए लेिकन अब वीर7र का ि7मा" अपने आप से ब|ल रहा था 'ििि ििििि िि िि ििि िििि िि िििि िि
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